एमएलसी चुनाव में पर्चा दाखिल करने और वापस लेने वालों की अपनी-अपनी कहानी रही। किसी ने अपने झंझट निपटवाने को पर्चा वापस लिया, तो चर्चा ये भी है कि सपा के ही कुछ नेताओं ने अपने नंबर बढ़वाने के लिए पहले पर्चे दाखिल कराये और फिर वापस कराए।
भाजपा से पर्चा भरने वाले वीरेंद्र यादव को लेकर चर्चा है कि उन्हें सपा ने ही प्लांट कराया था। इसके पीछे सपा नेताओं की पूरी टीम लगी रही। यह टीम अपनी रणनीति और एकजुटता के कारण आला कमान की नजरों में चढ़ चुकी है।
राहुल मवाना का पर्चा मवाना की चेयरमैन पति डा. नरेश चंद्रा ने दाखिल कराया था। डा. नरेश चंद्रा और हस्तिनापुर विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि के बीच छत्तीस का आंकड़ा है।
जिस कारण डा. चंद्रा की पत्नी चेयरमैन डा. नीरा चंद्रा के खिलाफ कई जांच चल रही हैं। प्रभुदयाल वाल्मीकि का हस्तक्षेप कम करने के लिए डा. चंद्रा ने गेम खेला और एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल के माध्यम से समझौता हुआ और राहुल मवाना का पर्चा वापस हुआ।
अनिता पहाड़पुरिया के पति धीरज पहाड़पुरिया ब्लाक प्रमुख चुनाव में सपा से टिकट मांग रहे थे। उनकी पैरवी जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह भी कर रहे थे। लेकिन अतुल प्रधान ने यहां अनिता पहाड़पुरिया की दावेदारी खत्म कराकर प्रेम कुमार को प्रत्याशी बनवा दिया।
इसके बाद अनिता चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गयीं। चर्चा है कि धीरज पहाड़पुरिया को दोबारा पार्टी में लाने और प्रभावशाली बनाने के लिए उनका नामांकन कराया गया और पर्चा वापस कराकर एक नेता ने अपने नंबर नेताओं की नजर में बनाये।
वहीं हबीब अहमद के पर्चे को लेकर चर्चा तब हुई, जब नामांकन वापसी के समय उनके साथ विधायक गुलाम मोहम्मद आये। हबीब ने खुद बताया कि गुलाम मोहम्मद उनके रिश्तेदार हैं।
पर्चा वापस करने आये पांच प्रत्याशियों में एक तिलकराम जाटव ही अकेले ऐसे रहे, जिनके साथ कोई नेता नहीं आया। यहां दबाव की रणनीति बताई जा रही है।
बेचैन नजर आए वीरेंद्र सिंह यादव
मेरठ। भाजपा से एमएलसी चुनाव का पर्चा दाखिल करने वाले वीरेंद्र सिंह यादव बृहस्पतिवार को जब पर्चा वापस लेने पहुंचे, तो उनकी बेचैनी साफ नजर आ रही थी।
वीरेंद्र सिंह यादव ने 15 फरवरी की सुबह सपा छोड़कर भाजपा ज्वाइन की और नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। तब उनके चेहरे पर जो चमक और मुस्कान नजर आ रही थी, नामांकन वापसी के समय वह गायब थी। बल्कि उनके चेहरे पर तनाव और बेचैनी नजर आई।