एमएलसी चुनाव में हुई किरकिरी को भाजपा पचा नहीं पा रही है। केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय पार्टी के साथ जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक है। भाजपा को पटखनी देने की पटकथा सपा नेताओं ने चार दिन पहले से लिखनी शुरू कर दी थी।
मेरठ-गाजियाबाद एमएलसी सीट पर बागपत और हापुड़ जनपद भी आते हैं। इस सीट के अंतर्गत जितने भी संसदीय क्षेत्र हैं, वहां भाजपा का सांसद है। मेरठ में चार विधायक तो गाजियाबाद और मेरठ में महापौर भाजपा के हैं। इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी पार्टी ने काफी सीटें जीती हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, किसान मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित तीन प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक भी मेरठ के हैं। पश्चिमी क्षेत्र के महामंत्री और तीन मंत्री भी मेरठ के हैं। इतनी बड़ी फौज को सपा के चंद बड़े नेताओं ने चकमा देकर चारों खाने चित कर दिया।
सपा के जाल में बुरी तरह फंसी भाजपा
भाजपा ने पहले गगन कसाना को मैदान में उतारने की तैयारी की। लेकिन गगन की वोट एमएलसी क्षेत्र में नहीं थी। ऐसे में चार फरवरी को वोट बनवाने के लिए आवेदन किया गया। इसके बाद गगन कसाना के नाम से 11 फरवरी को नामांकन पत्र खरीदा गया। सूत्रों की मानें तो अंतिम समय तक गगन की वोट नहीं बनी और वह चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए।
इसी बीच सपा ने पैंतरा चला और सेंधमारी कर भाजपा से ही निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य विक्की तनेजा के माध्यम से वीरेंद्र यादव की एंट्री करा दी। यह भाजपा नेताओं की अदूरदर्शिता या अति उत्साह ही कहा जायेगा कि उन्होंने वीरेंद्र यादव के बारे में पूरी जानकारी किए बगैर पर्चा दाखिल करा दिया। नामांकन के अंतिम दिन पर्चा दाखिल कराया गया और अगले ही दिन वीरेंद्र सपा में शामिल हो गए।
मैदान में न उतरते तो ठीक था
भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी अपने गृह जनपद में हुई इस किरकिरी से खासे नाराज हैं। क्योंकि वाजपेयी ने प्रत्याशी चयन में गंभीरता का निर्देश पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष और महामंत्री को दिया था। लेकिन जिस तरह किरकिरी हुई, उससे राष्ट्रीय नेतृत्व तक संदेश ठीक नहीं गया है।
वाजपेयी खेमे का मानना है कि यदि भाजपा यहां से चुनाव न लड़ती तो इतनी किरकिरी नहीं होती, जितनी अब हुई है। इस मामले में प्रांतीय नेतृत्व ने जांच शुरू कर दी है। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।