बसंत पंचमी के पावन मौके पर शुक्रवार को बॉलीवुड की चार महान हस्तियां मेरठ की मेहमान बनीं। गीत-संगीत, सुर और शब्दों के जादूगर गीतकार आनंद राज आनंद ने मेरठ से जुड़ी अपनी यादों को ताजा किया।
हास्य अभिनेता असरानी, मनोज वाजपेयी और आशिकी बॉय राहुल राय ने बसंती बयार में नए रंग घोले। कलाकार वेंकटेश्वरा ग्रुप के नए स्कूल ब्लूमिंग बड क ी शाखा का शुभारंभ करने आए थे।
प्रकाश झा ने छीन लिया मेरा किरदार
अलीगढ़ विवि के प्रोफेसर डॉ. रामचंद्र सिरस के रूप में जल्द ही पर्द पर नजर आने वाले मनोज वाजपेेयी कहते हैं, दर्शकों ने शुरू से मुझे कलात्मक फिल्मों में देखा है। इसलिए अब चरित्र प्रधान भूमिका करना चाहता हूं। इसलिए कॉमेडी या दूसरे किरदार नहीं निभा सकता।
अपने सारे रोल मैं शिद्दत से करता हूं। लेकिन अब तक जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण अभिनय फिल्म दूरंतो में होगा। प्रकाश झा से अच्छे संबंधों के बावजूद उनकी अगली फिल्म जय गंगाजल में अपने न होने पर मनोज कहते हैं, झा अभी तक निर्देशक थे। पहली बार अभिनय कर रहे हैं।
जय गंगाजल में प्रकाश झा जो किरदार निभा रहे हैं, वो किरदार मुझे मिलता, लेकिन मेरा किरदार तो प्रकाश झा ने चुरा लिया। एक सवाल के जवाब में कहा कि फिल्में बदल गई हैं, ऐसा हम नहीं कह सकते। पहले हर चीज पर एक फिल्म होती है। अब सारी चीजें एक फिल्म में होती हैं।
हास्य, रोमांस, एक्शन सब फिल्म में मिलेगा। दर्शकों की बढ़त जिसे मिले वो फिल्म चल जाती है। जैसे जनता ने बढ़त देकर भाजपा को जिताया, ऐसे ही फिल्म जीतती है। अलीगढ़ में, मेरी भूमिका प्रोफेसर डॉ. रामचंद्र सिरस की है, जो निजी जीवन की परेशानियों के चलते कोर्ट में मुकदमा लड़ते हैं। इस किरदार को करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।
मस्तीजादे असरानी नहीं, सनी लियोनी की फिल्म
चुपके-चुपके, खुशबू, अभिमान से लेकर शोले और हालिया रिलीज मस्तीजादे जैसी कॉमेडी फिल्मों में अभिनय की अमिट छाप छोड़ने वाले असरानी कहते हैं, जब भी मेरठ आता हूं, एकदम नया लगता है।
मुंबई में मेरठ के लोगों की बहुत कद्र है। नसिरुद्दीन शाह से लेकर विशाल भारद्वाज तक को मुंबई में सराहा जा रहा है। हालिया फिल्म मस्तीजादे में सनी लियोनी के पिता क ी भूमिका निभाने में कैसा अनुभव रहा, इस पर असरानी कहते हैं, मस्तीजादे मेरी नहीं, सनी लियोनी की फिल्म है।
दर्शक केवल सनी लियोनी को देखने आते हैं। हिंदी फिल्में तो कर चुका हूं, कई सारे प्रोजेक्ट हैं जो रिलीजिंग के लिए पेंडिंग हैं। कु छ छोटे बजट की फिल्में हैं।
बड़े कलाकारों की फिल्मों के बीच में छोटे कलाकारों और छोटे बजट की फिल्मों को वितरक नहीं मिलते, इसलिए वो रिलीजिंग से रह जाती हैं। कुछ बंगाली और मराठी फिल्में हैं जो आने वाली हैं। कृष्णा और हरमन बावेजा के साथ भी फिल्म की है।
दिखा गुरु -शिष्य का सम्मान
मंच पर गुरु और शिष्य की परंपरा का नजारा भी देखने को मिला। हास्य अभिनेता असरानी पहले पहुंचे। बाद में मनोज वाजपेयी आए। असरानी ने वरिष्ठ कलाकार होने के बाद भी बुके देकर मनोज को सम्मानित किया।
मनोज वाजपेेयी ने असरानी को सम्मान देते हुए कहा अभिनय की इतनी महान हस्ती के सामने में क्या बोल सकता हूं। असरानी के आज्ञा देने पर मनोज वाजपेयी ने बात आगे बढ़ाई।
गायक बनने आया था:आनंद राज
जिस देश में गंगा रहता है, मस्ती, सुर सहित सैकड़ों फिल्मोें को अपने संगीत के जादू से सजाने वाले गीतकार आनंद राज आनंद कभी भी म्यूजिक डायरेक्टर नहीं बनना चाहते थे। उनका सपना गायक बनने का था, लेकिन बॉलीवुड ने उन्हें संगीत निर्देशक बना दिया।
आनंद राज आनंद ने बताया बचपन में किशोर, रफी, मुकेश के गीत सुनकर उनकी कॉपी करता। कुछ दिन बाद लगा दूसरों के लिखे गीत नहीं गाऊंगा, खुद लिखूंगा। बिना किसी तालीम के अपने गीत लिखे। जब गीतों का गठ्ठर बन गया तो उन्हें मुंबई ले जाकर दिखाया।
पंकज उधास को कॉपी करके गजलें भी लिखी। मुंबई गया तो पहली फिल्म मेजर साहब मिली, जिसमें गीत ‘अकेली न बाजार जाया करो’ लिखा। संगीत में आया बदलाव यह है आज संगीत सुनता नहीं देखा जाता है। दर्शक गीतों को छायागीत, जयमाला में सुनकर पसंद नहीं करते, चैनलों पर देखकर गुनगुनाते हैं।
वर्तमान गायकों मं सोनू निगम बेस्ट हैं। आशिकी टू का गीत ‘क्योंकि तुम ही हो’ वर्तमान गायिकी का बेजोड़ नमूना है। संगीत इलेक्ट्रानिक वाद्य यंत्रों पर बनता है, उसकी रुह खत्म हो चुकी है। मैनुअल इंस्ट्रूमेंट से गीत में जान आती थी। आने वाली फिल्म संजय गुप्ता की मुंबई मांग, डॉन भाई साहब, दिल टू है, एलबम भी कर रहा हूं।