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14वें दिन मिला अभागे गौरव का शव

Sat, 13 Feb 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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12 साल के अभागे गौरव का शव 14वें दिन शुक्रवार को जागृति विहार सेक्टर-2 के नाले से बरामद हो गया। वह भी तब, जब एक महिला ने नाले में बच्चे का सिर देखकर शोर मचाया। शव देखते ही जहां मां की अपने बेटे को जिंदा देखने की आस टूट गई तो सरकारी सिस्टम की मानसिकता और कार्यकुशलता पर भी सवालिया निशान लग गए। क्योंकि नगर आयुक्त ने इस हादसे के महज चार दिन बाद ही इसका एक तरह से दावा कर दिया था कि गौरव तो नाले में गिरा ही नहीं। गिरता तो अब तक मिल जाता। इसकी सूचना शासन को भी भेज दी थी।
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यह हुआ था हादसा
नौचंदी थाना क्षेत्र की फूलबाग कॉलोनी निवासी सुशीला का पुत्र गौरव (12) एक पैर से लाचार था। जो विगत 30 जनवरी की दोपहर नेहरू नगर पुलिया के पास बच्चों के साथ खेलते समय नाले में जा गिरा था। इसकी सूचना गौरव के दोस्त ने उसके घर पहुंचकर सुशीला को दी थी। नगर निगम ने गौरव की तलाश में लगातार चार दिन नेहरू नगर और आसपास के नालों को गहनता से खंगाला था।

उसके न मिलने पर नगरायुक्त उमेश प्रताप ने दावा कर दिया था कि अगर गौरव नाले में गिरता तो जरूर मिलता। हालात देखकर लगता नहीं कि वह नाले में गिरा होगा। नगरायुक्त ने इस संबंध में कमिश्नर और शासन को पत्र भेजकर मामला संदिग्ध होने की बात कही थी। यही नहीं इस मामले में मानव तस्करी का भी अंदेशा जताया था। इसके बाद पांचवें दिन सघन अभियान चलाकर गौरव के न मिलने पर निगम की टीम ने भी हाथ खड़े कर दिए थे।
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शव देखकर गश खाकर गिरी मां
शुक्रवार दोपहर जागृति विहार सेक्टर-2 स्थित बिजली घर के पास एक महिला ने नाले में बच्चे का सिर देखा तो शोर मचा दिया। नाले में लाश की जानकारी पर वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर सीओ सिविल लाइन, इंस्पेक्टर नौचंदी, एसओ मेडिकल भी पहुंचे। शव को मोर्चरी ले जाया गया। इन 14 दिनों में शव सड़-गल चुका था। पुलिस ने शव की शिनाख्त के लिए सुशीला को बुलाया तो कपड़ों के आधार पर अपने बेटे के शव को एक ही नजर में पहचान कर सुशीला गश खाकर गिर पड़ी।

नाले से ही कैसे मिल गई लाश
जिस नाले से गौरव का शव मिला, उसकी नेहरू नगर नाले से दूरी करीब तीन किलोमीटर मानी जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम ने पांचवें दिन नेहरू नगर नाले से काली नदी तक सघन अभियान चलाने का दावा किया था तो यह नाला कहां छूट गया था। क्या यह सिस्टम पर सवाल खड़ा नहीं करता। फिर क्या यह माना जाए कि बच्चा गरीब परिवार से था, इसलिए उसकी जान की कोई कीमत नहीं थी।

एक झटके में टूटी आस
सुशीला भी भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि उसका लाल सही सलामत मिल जाए। इसी आस में वह 13 दिन पहाड़ जैसे काट चुकी थी। लेकिन खोजबीन अभियान बंद कर देने से वह व्यथित थी। एक तो गरीबी, उस पर कोई सहारा और सिफारिश न होने पर जिला प्रशासन ने भी गौरव को ढूंढने के लिए कोई जहमत नहीं उठाई। शुक्रवार को जब पुलिस ने उसे मोर्चरी जाकर एक बच्चे की लाश पहचाने को कहा तो शव गौरव का होने पर उसकी यह आस भी एक झटके में टूट गई। सुशीला ने बिलखते हुए कहा कि उसे नहीं पता था कि उसे यह दिन भी देखने को मिलेगा। पड़ोस के लोग कहते थे कि हो सकता है कि गौरव कहीं चला गया हो। लेकिन मुझ बेसहारा की आखिरी उम्मीद भी टूट गई।

रुमाल ढूंढते रहे सीओ
मोर्चरी पर जब गौरव के शव की शिनाख्त हुई तो दुर्गंध के चलते सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार पहले तो रुमाल तलाशते नजर आए। लेकिन फिर वहां से तुरंत निकलकर गाड़ी में बैठकर गायब हो गए। सीओ के इस तरह जाने पर परिजनों ने आक्रोश भी जताया। बाद में इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा ने किसी तरह मामला शांत कराया। इस दौरान पार्षद कृष्ण कन्हैया और मनोज वर्मा भी पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी।

आर्थिक मदद दिलाएंगे : महापौर
देर शाम गौरव का अंतिम संस्कार सूरजकुंड स्थित बच्चा शमशान पर किया गया। इस दौरान महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि गौरव के परिवार को प्रदेश सरकार से ही नहीं बल्कि नगर निगम से भी आर्थिक मदद कराने का प्रयास किया जाएगा। परिवार बेहद गरीब है। हर संभव मदद की जाएगी।
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