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वेटिंग ने ली दर्द से तड़पते एबीबीएस छात्र की जान

Sat, 13 Feb 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के छात्र के पेट में इंफेक्शन होने पर कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक ने फीस लेने के बाद भी अपने घर उसे 45 मिनट वेट कराया। छात्र बुरी तरह तड़पता रहा, लेकिन चिकित्सक ने उसकी नब्ज तक नहीं पकड़ी। हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल ले जाया गया।
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वहां भी उसे 20 मिनट तक उपचार नहीं मिला। यहां से मेडिकल इमरजेंसी ले जाने के दौरान ही इस भावी चिकित्सक ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज में जमकर हंगामा हुआ। कॉलेज प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने डॉ. तुंगवीर आर्य से इस्तीफा ले लिया। उधर, घटना से नाराज छात्र और जूनियर डॉक्टर मामले में एफआईआर और कानूनी कार्रवाई कराने की मांग पर अडे़ हैं।

सहारनपुर के सरस्वती विहार (आईटीसी रोड) का निवासी संजीव पुत्र मदन पाल मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहा था। कई दिनों से वायरल और पेट में इंफेक्शन से पीड़ित था। बृहस्पतिवार को संजीव ने इमरजेंसी में दिखाया था। जहां डॉक्टरों ने नार्मल इंफेक्शन बताकर उसे भेज दिया। लेकिन उसके बाद भी उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार शाम अचानक से पेट में दर्द बढ़ा तो संजीव अपने भाई डॉ. विकास के साथ डॉक्टर तुंगवीर सिंह आर्य के घर पहुंच गया। डॉ. विकास का आरोप है कि घर पर दिखाने के लिए फीस भी जमा की, लेकिन करीब 45 मिनट उसे बैठाए रखा गया। इसी बीच संजीव की तबीयत बिगड़ती देख डॉ. विकास और अन्य कुछ छात्र उसे लेकर दौड़े।
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उन्होंने प्राइवेट में डॉ. प्रशांत सोलंकी के क्लीनिक पर इमरजेंसी में फीस जमा करा तत्काल देखने का आग्रह किया, लेकिन वहां पर भी उसे करीब 20 मिनट तक बैठाए रखा गया। उपचार न मिलने के कारण संजीव की हालत और ज्यादा बिगड़ती चली गई। इसके बाद डॉ. विकास उसे लेकर मेडिकल इमरजेंसी भागे लेकिन मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।

इंफेक्शन बढ़ने से फट गईं आंत
चिकित्सकों का कहना है कि पेट में इंफेक्शन का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ गया था। जिसकी वजह से संजीव की आंत फट गई। मेडिकल साइंस में ऐसी स्थिति को परफॉरेशन (आंतों का फटना) कहा जाता है। आंत फट जाने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर हुआ, जिसमें लीवर, किडनी व हार्ट काम करना छोड़ देता है। ऐसी स्थिति में मरीज को बचाना बेहद मुश्किल होता है। क्योंकि इसमें चिकित्सक को कुछ मिनट ही मिलते है, जिनका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।

जूनियर डॉक्टरों ने घेरी इमरजेंसी
छात्र की मौत के बाद एमबीबीएस के छात्रों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। छात्रों का आरोप था कि कॉलेज में वरिष्ठ डॉक्टर बैठते नहीं हैं, जिसकी वजह से मेडिकल कॉलेज के ये हालात हैं।

अप्रैल में होनी थी शादी
संजीव के माता-पिता उसका रिश्ता तय कर चुके थे। संजीव की मौत की सूचना पर भावी ससुराल के सदस्य भी इमरजेंसी में पहुंचे। रोते हुए उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे ने क्या-क्या सपने देखे थे। हम दोनों परिवारों ने छह अप्रैल को बच्चों की शादी करने का फैसला लिया था, जिसको लेकर दोनों परिवारों की तरफ से तैयारियां चल रही थीं।

तीन भाइयों में सबसे बड़ा था संजीव
संजीव का छोटा भाई विकास मेडिकल कॉलेज में बायो केमेस्ट्री विभाग में डेमोस्टेटर है। बताया गया है कि विकास का एमबीबीएस में संजीव से पहले वर्ष 2009 में चयन हो गया था। जबकि संजीव का वर्ष 2010 में एमबीबीएस में चयन हुआ था और अब इंटर्नशिप कर रहा था।
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