‘दिखावटी’ नेताओं के रुतबे पर बृहस्पतिवार को पुलिस कप्तान ने कैंची चला दी। सिफारिश पर गनर पाने वालों को झटका देते हुए ऐसे सात नेताओं के गनर 24 घंटे मे हटाने के आदेश जारी कर दिए। उसके बाद एसएसपी ने दूसरी सूची में तीन और गनर हटाने की बात कही है।
सांसद, विधायक, महापौर समेत अन्य नेताओं को मिलाकर वर्तमान में 116 गनर माननीय की सेवा में हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश ऐसे नेता भी हैं जिनके पास गनर महज स्टेटस सिंबल बनाए रखने के लिए हैं। इनमें कुछ को जिला समिति के द्वारा दिया गया तो कई नेता शासन में बैठे अपने आकाओं की सिफारिश लगाकर गनर पा गए। हालांकि कुछ नेताओं को जान का खतरा जताने पर भी गनर दिया गया। शासन ने कई बार आपत्ति जताई कि जिन नेताओं को गनर की वास्तविक जरूरत नहीं है, उनसे तुरंत गनर वापस ले लिए जाएं।
हाईकमान के निर्देश पर मेरठ में 55 गनरों को हटाया गया। जबकि मंगलवार को सात नेताओं नीरज मित्तल (भाजपा), वसी रजां (सपा), देवेंद्र गुर्जर (सपा), ओमपाल गुर्जर (सपा), बिजेंद्र सिंह (कोऑपरेटिव डायरेक्टर), अतुल गुप्ता (बिल्डर) समेत सात लोगों के गनर हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं।
पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक सत्यप्रकाश शर्मा ने बृहस्पतिवार को बताया कि इन सभी सातों नेताओं को नोटिस जारी कर दिया गया है कि वे तुरंत अपने गनर पुलिस लाइन को वापस कर दें। साथ ही गनर को फोन पर कहा गया कि यदि उन्होंने 24 घंटे में पुलिस लाइन में अपनी आमद दर्ज नहीं कराई तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी। एसएसपी डीसी दूबे के अनुसार जिन नेताओं के गनरों को हटाना है, उनके नोटिस जारी हो चुके हैं। दूसरी सूची में तीन अन्य नेताओं के गनरों के नाम शामिल हैं। बेवजह किसी भी नेता को मुफ्त में गनर नहीं दिए जाएगा।
कप्तान साहब! गनरों को मत हटाओ
गनर हटाने का नोटिस जारी होते ही इन नेताओं ने अपने-अपने आकाओं से संपर्क कर एसएसपी के पास सिफारिश लगवानी शुरू कर दी। भाजपा के एक विधायक ने एसएसपी को फोन कर कहा कि वह हमारा सक्रिय कार्यकर्ता है, उससे गनर मत हटाओ। लेकिन एसएसपी ने साफ कह दिया कि विधायक जी ऊपर से निर्देश हैं, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। गनर तो वापस करना ही होगा।