पिछले दिनों बारिश से क्षेत्र में हिंडन व काली नदी पूरे उफान पर आ गई। 45 साल बाद हिंडन नदी ने रौद्र रूप ले लिया। नदी के तेज बहाव ने किसानों की फसलों के साथ उनके अरमानों पर भी पानी फेर दिया है। हजारों बीघा रकबे में खड़ी धान, उड़द, ज्वार, मक्का और गन्ने की फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
इस बार धान और उड़द से अच्छी पैदावार की उम्मीद में किसान अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ दिवाली भी अच्छे तरीके से मनाने के सपने संजोए थे। ऐसे में अधिकतर किसानों की आस पूरी होती नजर नहीं आ रही। फसलों को नुकसान का आंकलन करने के लिए चार दिन पहले राजस्व कर्मियों ने मुआयना भी किया था लेकिन, अब तक किसी भी किसान को मुआवजा नहीं दिया जा सका है।
ये बोले क्षेत्र के किसान
नदी किनारे खेती तो काफी है लेकिन सभी फसलें नहीं हो पातीं। धान की फसल काफी अच्छी रही। उड़द भी बेहतर दिखा पर पिछले दस दिनों में आई बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर डाला। खेत में खड़ी उड़द, ज्वार, मक्का, धान की फसल सैलाब में बह गई। - मनव्वर पिठलोकर
फसलों को 80 फीसदी तक नुकसान हुआ है। इससे घरेलू जरूरतें पूरी होने की उम्मीद टूट गई हैं।ठेके पर ली जमीन में खड़ी फसल से काफी नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग की टीम मुआयना करने का दावा कर रही है लेकिन किसानों से संपर्क नहीं किया गया। - इस्लाम बपारसी
जब तक फसल घर में नहीं पहुंच जाए तब तक उसे अपना नहीं माना जा सकता। हिंडन नदी के बढ़े जलस्तर से काफी नुकसान हुआ है। इस बार पहाड़ की आफत ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। फसलों के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। - सुखपाल, बपारसी
धान की फसलें लहलहा रही थी। लेकिन पहले झमाझम बारिश फिर बेमौसम आई बाढ़ ने तटवर्ती किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। खेतों में पककर कटने के लिए तैयार खड़ी फसलें बाढ़ से तबाह हो गईं। - अकरम पिठलोकर
हिंडन नदी के किनारे पिठलोकर व हर्रा क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर को लेकर मुआयना किया गया। पहले चरण का सर्वे पूरा हो गया है। इसके बाद जलस्तर घटने पर फिर से सर्वे कराया जाएगा, जिससे किसानों की फसलों के नुकसान का सही ब्योरा मिल जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। - जागृति अवस्थी, एसडीएम सरधना