उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में धरने के सात साल पूरे होने पर किसानों ने हवन किया है। 600 एकड़ जमीन को लेकर एमडीए और किसानों के बीच विवाद चला आ रहा है। चार जून 2014 से धरना लगातार जारी है। किसानों ने अपना धरना स्वर्गीय बाबा इलम सिंह और बाबा विजयपाल सिंह के नेतृत्व में शुरू किया था।
किसानों द्वारा यह प्रण लिया गया कि जब तक सरकार किसानों के साथ कोई फैसला नहीं लेती तो इस तरह के धरने ऐसे ही चलते रहेंगे। उनका कहना है कि अभी सात साल हुए हैं अगर 700 साल भी धरना चलाना पड़ा तो किसान पीछे नहीं हटेंगे। किसानों ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच अन्नदाता ने जो अपनी भूमिका निभाई है उसे सभी जानते हैं, लेकिन सरकार अपनी आंखें बंद कर बैठी हुई है। उनका कहना है कि किसान आज भी सबका पेट भरने की हिम्मत जुटा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह धरने-आंदोलन अब किसानों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, जिस राह पर हमारे बुजुर्ग चले थे। अब यह जिम्मेदारी हम सब नौजवानों के कंधों पर आ गई है। इसे हम मरते दम तक निभाएंगे। उनका कहना है कि अपनी जमीन का एक कतरा भी किसी को लेने नहीं देंगे। जो जमीन हमारी मां है, सरकार की निगाहें उस जमीन पर कभी पड़ने नहीं देंगे। वहीं इस हवन के मौके पर बाबा विजयपाल सिंह की अध्यक्षता में मदन घोपला, सुभाष घोपला, करण घोपला, मनीष घोपला, जगबीर, मुकेश, अमित धारीवाल दीपक आदि मौजूद रहे।
ये है मामला
1989 में मेरठ विकास प्राधिकरण में शताब्दी नगर योजना शुरू की गई थी। एमडीए ने कंचनपुर घोपला, जैनपुर, रिठानी, अच्छरौंडा आदि गांव की 1700 एकड़ जमीन किसानों से अधिग्रहित की थी। किसानों को मुआवजे की धनराशि भी दे दी गई। बावजूद इसके एमडीए अभी तक 11 एकड़ पर ही कब्जा कर पाया है। 600 एकड़ पर किसान और एमडीए के बीच विवाद चल रहा है। अब आवंटी कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी आवंटी है जो सीधे किसानों को मनाकर कब्जा ले रहे हैं। इसके अलावा एमडीए आवंटियों के ब्याज सहित जमा धनराशि को नहीं लौटा रहा है। इसके लिए आवंटी रेरा की शरण में है।