सत्य की जीत हुई
अधिवक्ता छोटेलाल बंसल ने बताया कि टीपीनगर थाने में हत्या, जानलेवा हमला, दंगा, लूट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में आईपीसी की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। उन्होंने कहा कि न्याय की जीत हुई, सत्य सामने आया। आरोपियों को पुलिस द्वारा गलत रूप से फंसाया गया था। न्यायालय में एफआईआर की असल तहरीर पर दाखिल नहीं की गई। मृतकों को पोस्टमार्टम व घायलों की मेडिकल रिपोर्ट भी सिद्ध नहीं हुई।
इन्हें बनाया गया था आरोपी
कैलाश भारती, कालीचरण, सुनील, प्रदीप कुमार, प्रेम सिंह, सुशील, नत्थू, कल्लू ठेकेदार, रामभली, रघुवर, रामदास, रामचन्द्र, धर्म सिंह, जीत, धर्मपाल, किशन, तिलकराम, रामभरी, बुद्ध, रामलाल, ताराचंद, दीपचंद, दयाराम, सुनील, राजू, सुभाष, तनसुख, प्रकाश, राम सिंह, हुकम सिंह, रामलीला, गरीबदास, नत्थू, बिक्कू, चन्द्रभान, जुगल किशोर, पप्पू, भिकारी, संतराम, सीताराम, तेजपाल, राजपाल, प्रकाश, हरभन, रघुवीर, वीर सिंह, महेन्द्र, राकेश, भोले, कून्नू, बुद्धप्रकाश, रोहिताश, सौरभ, किशन, पिन्टू, सुभाष, नरेन्द्र, कान्ति, प्रेम सागर, बिरजू, ओम प्रकाश, दीपचंद सैनी, गंगाराम, ननका, ओमप्रकाश, चन्द्रलाल, हरीओम, अशोक, रूपचंद, पूरन, सुभाष, नरेश, राकेश, सतीश, विजेन्द्र सहित कुल अन्य 79 आरोपी।
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