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पेश की मानवता की मिसाल: पहले डॉक्टर ने मरीज की जान बचाई फिर मरीज ने डॉक्टर की

Fri, 13 Nov 2020 01:49 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डॉ. अनिल तालियान और प्लाजमा दान करते पंकज गोयल। अमर उजाला अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल में जहां अनगिनत परेशानियां हैं, वहीं लोग मुश्किल हालात में भी मानवता की मिसाल पेश करने में पीछे नहीं हैं। ऐसे ही एक मामले में कोरोना के मरीज रह चुके पंकज गोयल ने अपना इलाज करने वाले डॉ. अनिल तालियान के संक्रमित होने पर उन्हें प्लाज्मा दान किया है। इससे साबित होता है कि कोई भी व्यक्ति कभी भी किसी के भी काम आ सकता है। 

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द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी में वरिष्ठ सहायक प्रबंधक और मेरठ लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि हर्ष गोयल के चाचा पंकज गोयल 24 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव आए थे। 31 अगस्त को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इस दौरान उनका इलाज आनंद अस्पताल के डॉ. तालियान ने किया था। 
 
गोयल ने बताया कि उन्हें बुधवार को अस्पताल के व्हाट्सएप ग्रुप से पता चला कि डॉ. तालियान कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्हें प्लाज्मा की जरूरत है। इस बीच उन्होंने डॉ. सुभाष यादव से बात की। डॉ. यादव ने उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पर वह प्लाज्मा दान करने के लिए तैयार हो गए। गुरुवार को उनकी एंटीबॉडीज की जांच की गई। वह अच्छी थी तो उन्होंने प्लाज्मा दान कर दिया। 
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गोयल ने कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि उन्होंने एक नेक काम किया है। अस्पताल मैनेजर मुनीष पंडित ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी सफल रही है। डॉ. तालियान ने गोयल को प्लाज्मा देने के लिए धन्यवाद दिया है।

कोरोना पॉजिटिव तीन महीने तक डोनेट कर सकते हैं प्लाज्मा
जो मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और 28 दिन का कोरोना समय पूरा हो चुका है। वे तीन महीने तक प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। प्लाज्मा थेरेपी सिस्टम इस धारणा पर काम करता है कि जो मरीज किसी संक्रमण से उबर कर ठीक हो जाते हैं, उनके शरीर में वायरस के संक्रमण को बेअसर करने वाले एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं। इसके बाद उसी वायरस से पीड़ित नए मरीजों के खून में पुराने ठीक हुए मरीज का खून डालकर इन एंटीबॉडीज के जरिए नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है। जब कोई वायरस किसी व्यक्ति पर हमला करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज कहे जाने वाले प्रोटीन विकसित करती है। अगर वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के रक्त में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित होता है तो वह वायरस से होने वाली बीमारियों से ठीक हो सकता है।

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