गोयल ने कहा कि उन्हें बेहद खुशी है कि उन्होंने एक नेक काम किया है। अस्पताल मैनेजर मुनीष पंडित ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी सफल रही है। डॉ. तालियान ने गोयल को प्लाज्मा देने के लिए धन्यवाद दिया है।
कोरोना पॉजिटिव तीन महीने तक डोनेट कर सकते हैं प्लाज्मा
जो मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और 28 दिन का कोरोना समय पूरा हो चुका है। वे तीन महीने तक प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। प्लाज्मा थेरेपी सिस्टम इस धारणा पर काम करता है कि जो मरीज किसी संक्रमण से उबर कर ठीक हो जाते हैं, उनके शरीर में वायरस के संक्रमण को बेअसर करने वाले एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं। इसके बाद उसी वायरस से पीड़ित नए मरीजों के खून में पुराने ठीक हुए मरीज का खून डालकर इन एंटीबॉडीज के जरिए नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है। जब कोई वायरस किसी व्यक्ति पर हमला करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज कहे जाने वाले प्रोटीन विकसित करती है। अगर वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के रक्त में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित होता है तो वह वायरस से होने वाली बीमारियों से ठीक हो सकता है।
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