अभिभावकों को बदलना होगा माहौल
महिलाओं-बेटियों को अच्छा माहौल और सुरक्षा देना चाहते हैं तो अभिभावकों को घर का माहौल बदलना होगा। जब अभिभावक अपना अधिकांश समय मोबाइल, पार्टी में बिताएंगे तो वो बच्चों को क्या शिक्षा देंगे। चाहे लड़का हो या लड़की अभिभावकों को दोनों को ही समझाना होगा, संस्कारित करना होगा। केवल लड़की को समझाने से बात नहीं बनेगी। स्कूलों में महिला सशक्तीकरण पर निबंध और दूसरे आयोजन हों, लेकिन उसमें लड़कों को भी भाग दिलाया जाए। - डॉ. सीमा जैन, प्रवक्ता लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज
बढ़ती जनसंख्या पर रोक जरूरी
पश्चिमी उप्र हो या देश का कोई भी इलाका, महिलाओं से अपराध और उनके प्रति गलत रवैये की प्रमुख वजह बढ़ती जनसंख्या है। इस पर रोक जरूरी है। वैदिक सभ्यता में कहीं भी महिला अपराध का जिक्र नहीं है, लेकिन निर्भया केस के बाद से देखें तो महिला अपराध के मामलों की संख्या कितनी अधिक बढ़ी है। इसके साथ ही कानून का सही पालन होना भी जरूरी है। निजी दायित्वों के साथ ही हमें सामाजिक दायित्वों को निभाने के प्रति भी गंभीर होना पड़ेगा। - डॉ. सुशील शर्मा, शिक्षक, सीसीएसयू विधि अध्ययन संस्थान
शिक्षा, कानून व्यवस्था सही रखना
देश का जो क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम है वो बढ़ते महिला अपराध का प्रमुख कारण है। लोगों में शिक्षा की कमी है। इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी है कि देश में कानून व्यवस्था का पालन ठीक तरीके से हो। बेंगलूरू कांड के बाद जो एनकाउंटर हुआ वो भी कानून व्यवस्था की ढिलाई का ही परिणाम है। बेशक लोगों ने उस एनकाउंटर को सही माना, लेकिन देश और समाज के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है। बेटियों को सुरक्षित करना चाहते हैं तो देश की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करना पड़ेगा। - डॉ. विवेक, कोऑर्डिनेटर विधि अध्ययन संस्थान सीसीएसयू
संयुक्त परिवार की परंपरा पर लौटना होगा
जब संयुक्त परिवार होते थे तो बच्चों को सही शिक्षा मिलती थी। किताबी शिक्षा के साथ उन्हें संस्कारों की समझ, अच्छी-बुरी चीजों की जानकारी भी मिलती थी। बच्चे को डर होता था कि अगर उसने कोई गलत काम किया तो परिवार का कोई न कोई सदस्य उसे सजा देगा, लेकिन एकल परिवार में बच्चे सारा दिन अकेले रहते हैं। बच्चा क्या कर रहा है, उसके दोस्त, उसकी एक्टिविटी के बारे में माता-पिता को भी पता नहीं होता। यही चीज आगे बढ़कर क ब हिंसा बन जाए पता नहीं चलता। - डॉ. दीप, प्रवक्ता डीएन पीजी कॉलेज
अकेलापन, संवादहीनता है मुख्य वजह
बेटियों के साथ जो घटनाएं, अपराध हो रहा है उसकी बड़ी वजह बच्चों का अकेलापन है। अब बच्चा सारा दिन घर में अकेला रहता है। उसके मन में कोई सवाल है, बात है वो उसे किसी से साझा नहीं कर पाता। माता-पिता को बच्चे से बात करने का वक्त नहीं है। ऐसे में जब भी बाहर उसे किसी व्यक्ति से थोड़ा सा प्यार, अपनापन मिलता है बच्चा वहां झुकने लगता है। इसी झुकाव के कारण कई लोग बच्चियों का गलत फायदा भी उठा लेते हैं और वो किसी से कुछ कह नहीं पाती। बच्चों की जिंदगी के इस अकेलेपन को दूर करना होगा। - मीनू सिरोही, वाइस प्रिंसिपल कृष्णा पब्लिक स्कूल
डीएनए में बैठ चुका है डर
पुरातन काल से ही हमारे देश में महिलाओं पर अत्याचार होते रहे हैं। वैदिक काल से लेकर मुगलों तक के काल को हम देखें तो महिलाओं पर अत्याचार हुए हैं। तो डर का वो माहौल हमारे डीएनए में बैठ चुका है। महिलाएं घर से निकलकर दफ्तरों में जा रही हैं, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं लेकिन उस क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता पुरुषों को आज भी पसंद नहीं हैं। यही वजह है कि जब पुरुषवाद हावी होता है तो वो अपराध या हिंसा के रूप में निकलता है। - डॉ. अनीता मोरल क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट
बेटा-बेटी दोनों को संस्कार जरूरी
मां खुद देर रात पार्टी में जाएगी तो बेटी या बेटे को कैसे गलत काम करने से रोक पाएगी। पिता बच्चों के सामने मां को पीटेगा या गलत भाषा बोलेगा तो बेटा भी उसी काम को सीखेगा। क्योंकि बच्चों की पहली पाठशाला उसका घर होता है। अब समाज में घरों में यही हो रहा है। बेटी को रोकने, टोकने के साथ ही बेटे को समझाने की भी जरूरत है। तभी हम समाज में बेटियों को अच्छा माहौल दे पाएंगे। - सिल्की जैन, शिक्षिका ब्लॉसम्स स्कूल