वहीं अधिवक्ता की मौत के बाद गुस्साए वकीलों ने गंगानगर थाने में हंगामा किया। सुसाइड नोट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। इस दौरान वकीलों ने शव को नहीं उठने दिया। उनकी मांग है कि जब तक विधायक पर केस दर्ज नहीं होगा, वे तब तक शव नहीं उठने देंगे। सुसाइड नोट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की और विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद ही शव को उठने दिया।
लिस ने विधायक को बचाने के लिए तमाम प्रयास किए। यहां तक कि इंटरनेट की कनेक्टिविटी के तार तक भी काट दिया। पुलिस ने अधिवक्ताओं को बताया कि कनेक्टिविटी नहीं है। एफआईआर की कॉपी नहीं दी जा सकती। आठ घंटे गहमागहमी के बाद पुलिस ने विधायक सहित 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया।
अधिवक्ता ओंकार सिंह तोमर के पुत्र और उनकी पुत्रवधू के बीच विवाद चल रहा है। जनप्रतिनिधि होने के नाते दोनों परिवार के बीच समझौते की बात कराई गई थी। दोनों की सहमति से दोनों परिवार के गणमान्य लोगों के बीच में यह समझौता हुआ। मेरे द्वारा कभी भी अधिवक्ता और उसके परिवार पर कोई भी दबाव नहीं दिया गया हैं। उनकी मौत के मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है। पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करे। राजनीति के तहत मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। मैं हमेशा जनता के साथ ही रहूंगा।
-दिनेश खटीक, भाजपा विधायक हस्तिनापुर
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