प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर चुका 104 करोड़ की संपत्ति
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी केस दर्ज कर घोटाले के मुख्य सूत्रधार संजय भाटी की 104 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुका है। पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय ने संजय भाटी के नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर नगर और इंदौर में 19 संपत्तियों के अलावा सात अन्य लोगों के नाम पर खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की थी। साथ ही गर्वित इनोवेटिव के नाम के 26 प्लॉट भी प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर चुका है। संजय भाटी के खातों में जमा 2.28 करोड़ रुपये भी सीज कर दिए गए थे।
सुनील की रही पूरी भूमिका
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि सुनील प्रजापति साल 2017 में अतिरिक्त निदेशक के रूप में कंपनी में शामिल हुआ था। उसने साल 2018 में कंपनी से त्यागपत्र भी दे दिया था। लेकिन इस दौरान बाइक बोट के नाम पर भारी निवेश कराया गया। बाइक बोट स्कीम में एक मुश्त 62200 रुपये का निवेश कराया जाता था और उसके बदले साल भर तक 9765 रुपये देने का वादा किया जाता था। बाद में कंपनी के संचालक फरार हो गए तो लोगों ने मुकदमे दर्ज कराने शुरू किए।
करीबियों के नाम की संपत्ति
इनामी सुनील प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों ने खुशी जताई है। दादरी के कोट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्य कार्यालय पर लगभग 15 माह से धरना देकर बैठे मुन्ना बालियान और अन्य धरनारत निवेशकों का कहना है कि मुख्य आरोपी संजय भाटी ने फर्जीवाड़े से जमा की गई अरबों की संपत्ति को करीबियों के नाम किया है। आरोपी ने देश-विदेश में कई संपत्तियां खरीदीं। इसके बावजूद केस में नामजद आरोपी के परिवार व अन्य करीबियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। मेरठ ईओडब्ल्यू भी यह बात कह रही है कि फरार आरोपी केस को प्रभावित कर सकते हैं। मुन्ना ने बताया कि संजय भाटी का भाई करन, सचिन और चाचा विदेश भाटी भी अब तक फरार है। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद करन और सचिन ने ही निवेशकों को साधने के लिए लाखों फर्जी चेक दिए थे। आरोपियों ने कई युवकों को दफ्तर में बुलाकर लाखों चेक फर्जी हस्ताक्षर कराकर निवेशकों को भेजे थे।
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