दुनिया की वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी से हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी कितनी अलग है। यहां क्या बदलाव किया जा सकता है। किस तरह से यह दूसरी सेंक्चुरी से भिन्न है। यहां पर कछुओं के संरक्षण से लेकर घड़ियाल और डॉलफिन बचाने की मुहिम कितनी कारगर सिद्ध हो रही है। इन तमाम बातों पर शोध करने के लिए न्यूयॉर्क और टेक्सास यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, शोधार्थी और एक्सपर्ट की टीम मंगलवार को हस्तिनापुर सेंक्चुरी पहुंचनी थी। लेकिन होली के कारण टीम नहीं आ सकी। बताया गया कि टीम अब होली के बाद आ सकती है। यह टीम भारत की कई वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी पर काम कर रही है। टीम यहां से जानकारी लेकर उसे शोध में शामिल करेगी।
हस्तिनापुर रेंज प्रभारी आईएफएस आकाश बधावन ने बताया कि यह विदेशी छात्रों-प्रोफेसर और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की यह टीम भारत में कई वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में स्टडी कर रही है। भारत के मौसम के अनुकूल दूसरी वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में जीवों और वहां की प्रकृति के बारे में भी ब्योरा जुटा रहे हैं। हस्तिनापुर सेंक्चुरी में यहां क्या और डेवलेप हो सकता है इसको लेकर भी एक्सपर्ट के साथ चर्चा होगी। टीम को सबसे पहले हस्तिनापुर में बनाए गए इंटरप्रटेशन सेंटर का भ्रमण कराया जाएगा। जिसमें हस्तिनापुर सेंक्चुरी क्षेत्र में पाए जाने वाले हिरण, अजगर, सांप, कछुए, डॉल्फिन, घड़ियाल और पक्षियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके बाद वह वन विभाग में बनाए गए नेचुरल ट्रैक के बीच 20 से 25 प्रजाति के अनोखे पक्षी भी देख सकेंगे।
इतिहास की देंगे जानकारी
आकाश बधावन बताते हैं कि इस दौरान टीम को हस्तिनापुर में महाभारतकालीन इतिहास के बारे में बताया जाएगा। टीम के सदस्यों को ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण कराया जाएगा।
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