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एनसीईआरटी की नकली किताबों का मामला: एसजीएसटी ने आठ मुद्रकों को दिए नोटिस, पढ़िए पूरा अपडेट

Thu, 03 Sep 2020 03:15 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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एनसीईआरटी की नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में एनसीईआरटी की फर्जी किताबों के मामले में एसजीएसटी ने आठ मुद्रकों को नोटिस दिए हैं। उनसे पूछा गया कि क्या आपने ही किताबें छापीं हैं। अभी नोटिस का जवाब नहीं आया है। 

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एसजीएसटी विभाग के संयुक्त आयुक्त ओपी वर्मा ने बताया कि जिन आठ मुद्रकों को नोटिस दिए गए हैं, वे सभी मेरठ के हैं। लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं, क्योंकि हो सकता है कि उनके यहां मुद्रण का कार्य न हुआ हो, उनके नाम का इस्तेमाल किया गया हो। अगर ऐसा निकला तो उनकी बदनामी होगी, लिहाजा जब तक स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक उनका नाम नहीं बताया जा सकता है। उन्होंने बताया कि छापामारी के दौरान जो किताबें मिली थी, उन किताबों पर अलग-अलग आठ मुद्रकों का नाम लिखा हुआ था। इसके अलावा छापने के लिए कागज और स्याही कहां से खरीदी गई, इसका पता नहीं चल सका है। 

संयुक्त आयुक्त के अनुसार फर्म संचालक को उपस्थित होने के लिए कहा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में स्टेट जीएसटी अब फर्म को भी नोटिस देने की तैयारी कर रही है कि बताएं कि कागज कहां से आया। किताबें छापने के लिए जो कागज इस्तेमाल किया गया है, अगर वह किसी बिना रजिस्टर्ड फर्म से खरीदा गया है तो 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। एसजीएसटी (एसआईबी) के अपर आयुक्त शशि भूषण सिंह ने बताया कि उनके दस्तावेजों की जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि जीएसटी की चोरी हो रही थी या नहीं।
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पुलिस ने जीएसटी और फंड ऑफिस से मांगा जवाब
पुलिस ने जीएसटी विभाग और फंड ऑफिस को नोटिस भेजकर नकली किताब छापने वाले प्रकाशक का रजिस्ट्रेशन और कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांगा है। एसपी सिटी ने बताया कि एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में नामजद आरोपी संजीव व सचिन गुप्ता के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। एनसीईआरटी से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जीएसटी व फंड ऑफिस (कर्मचारी निधि संगठन) को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी है कि संजीव गुप्ता की फर्म में कितने कर्मचारी काम करते थे और इसका रजिस्ट्रेशन जीएसटी में है या नहीं। संजीव और सचिन की फर्म का रजिस्ट्रेशन किस नाम से है। पुलिस उन प्रकाशन फर्मों की भी जांच कर रही है, जिनका संबंध संजीव गुप्ता की फर्म से है। दावा कि नकली किताब छापने वालों का कई सरकारी कार्यालयों से सीधा संबंध है, उनकी रिपोर्ट लगनी भी जरूरी है ताकि केस और मजबूती से बन सके।

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