परिजनों ने किया नाबालिग होने का दावा
आरोपी के परिजनों ने उसका नाबालिग होना बताया है। इसके समर्थन में उन्होंने न्यायालय में उसकी हाईस्कूल की अंकतालिका भी प्रस्तुत की थी। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी की आयु तय करने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया था। किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के दौरान आरोपी के विद्यालय के शिक्षक समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।
शैक्षणिक रिकॉर्ड न मिलने पर कराया गया मेडिकल परीक्षण
कक्षा एक से चार तक का शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए 11 मई को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया था। इसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह से जिला अस्पताल लाकर उसका परीक्षण कराया गया। परीक्षण की रिपोर्ट अब बोर्ड के सामने पेश की जा चुकी है।
आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर 29 मई को सुनवाई
आरोपी के वकील का कहना है कि उन्होंने जिला न्यायालय में अपील दायर कर किशोर न्याय बोर्ड के मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत यदि विद्यालय से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। इस अपील पर जिला न्यायालय में 29 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है।