इस मामले में चार लोगों को नामजद कराया गया था। हुमायूं की हत्या को आठ महीने बीत जाने के बाद भी सरधना पुलिस हत्यारोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है। आरोप है कि थाने का एक दरोगा उन लोगों पर समझौते के लिए दबाव बना रहे है।
उन लोगों ने समझौता करने से इन्कार कर दिया तो गत 23 अक्तूबर को हत्यारों ने उन लोगों पर दबाव बनाने के लिए उनके भाई राशिद जैदी के साथ मारपीट की। जब वह उनके चंगुल से निकलकर भागने लगा तो उस पर दो राउंड फायरिंग की।
पुलिस को फायरिंग व मारपीट की वीडियो सौंपने के बाद भी दरोगा ने आरोपी पक्ष का ही साथ दिया और इंस्पेक्टर को गुमराह कर दिया। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई से नाराज करीब 20 परिवारों ने गांव से पलायन कर दिया है। उरूज जैदी ने बताया कि उनके पक्ष के सभी लोग गांव छोड़ रहे हैं।