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Meerut: मोहन भागवत बोले- संघ सत्ता का अभिलाषी नहीं, हिंदुओं को संगठित करना उद्देश्य; आजादी की लड़ाई पर ये कहा

Fri, 20 Feb 2026 10:19 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

माधवकुंज में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने खिलाड़ियों से सीधा संवाद किया। बोले, किसी वर्ग विशेष के विरोध के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काम नहीं करता है। विविधता में एकता ही हमारी संस्कृति का आधारभूत तत्व है। 
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मोहन भागवत विचार रखते हुए और उन्हें सुनते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघ को सत्ता की अभिलाषा नहीं है। संघ का मूल उद्देश्य समस्त हिंदू समाज को संगठित करना है। संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या किसी से स्पर्धा के लिए काम नहीं करता।
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कार्यक्रम में मौजूद क्रिकेटर भुवनेश्वर कुमार। - फोटो : अमर उजाला
शताब्दीनगर स्थित माधवकुंज में मेरठ और ब्रज प्रांत के लगभग 950 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघ को समावेशी मानते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि यह राष्ट्र भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी का है। भारत को मात्र भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। 
 

हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, यह एक विशेषण है। जब भी हमारी एकता खंडित हुई, राष्ट्र पर संकट आया। उन्होंने कहा कि पूजा पद्धति और देवी-देवता भिन्न हो सकते हैं, परंतु इस विविधता में एकता का भाव ही हमारी संस्कृति का आधारभूत तत्व है। 
 

उन्होंने कहा कि हमारा समाज चार स्तंभ संस्कार की प्रक्रिया, सनातन संस्कृति, धर्म का भाव और सत्य का साकार पर खड़ा है। संघ का एकमात्र कार्य संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन हेतु व्यक्ति निर्माण करना है। संघ के स्वयंसेवक आज समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब भी दिए।
 

मेरठ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धरती, यहीं से फूटी चिन्गारी
सरसंघचालक ने मेरठ को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धरा के रूप में याद किया। कहा कि देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम यहीं से ही शुरू हुआ था, इसके देश भर में जागृति आई। संपूर्ण देश में इस दिशा में प्रयास हुए और एक धारा सशस्त्र आंदोलन की पक्षकार बनी, जिसमें चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सुखदेव, राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों ने नेतृत्व प्रदान किया। दूसरी ओर जनता को जोड़ने, उनका समर्थन प्राप्त करने एवं राजनीतिक जागरूकता लाने के लिए कांग्रेस बनी। तीसरी धारा समाज सुधार के आंदोलनों से जुड़ी। डॉ. हेडगेवार इन सभी धाराओं को देख रहे थे। उन्होंने बाल्यकाल में ही कई बार अंग्रेजों के अत्याचार का विरोध किया। उन्होंने निश्चय किया कि राष्ट्र का बहुसंख्यक वर्ग जब तक एकजुट नहीं होगा, तब तक बाहर से आक्रांता आकर राज करते रहेंगे। इसलिए 1925 में डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की।
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भागवत ने दिए संघ से जुड़ने के पांच मंत्र
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़ने के पांच मंत्र दिए। बताया कि पहला संघ के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को अंदर से देखें और किसी दायित्व पर कार्य करें। दूसरा संघ के किसी अनुषांगिक संगठन से जुड़कर काम करें। तीसरा संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में किसी न किसी तरह सहयोग करें। चौथा आप अपना काम करते हुए संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम अथवा स्वयंसेवकों से संवाद बनाए रखें। अंतिम कोई न कोई अच्छा, प्रमाणिक एवं निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करते रहें। फिर आप स्वयंसेवक हों या न हों इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। हम मानते हैं कि आप स्वयंसेवक हैं।
 
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