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मेरठ: तीन-चार महीने से नहीं मिली सैलरी, मेडिकल कॉलेज में वेतन को लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का हंगामा

Thu, 05 Nov 2026 02:53 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में तीन-चार महीने से वेतन नहीं मिलने पर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बायोमैट्रिक हाजिरी की मांग उठाई।
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मेरठ मेडिकल में आउटसोर्सिंग कर्मियों का हंगामा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्योहार के महीने में भी वेतन नहीं मिलने से एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। बृहस्पतिवार को जेएमडी, एचआर, सोलंकी और उर्मिला कंपनियों के अधीन काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि किसी को तीन महीने तो किसी को चार महीने से वेतन नहीं मिला है। उनका कहना है कि वेतन के साथ ही भविष्य निधि (पीएफ) को लेकर भी समस्या बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने पोर्टल के बजाय बायोमैट्रिक मशीन से हाजिरी लगवाने की मांग उठाई।

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तीन-चार महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप
प्रदर्शन में नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय समेत विभिन्न विभागों में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। त्योहार के महीने में भी भुगतान नहीं होने से उनकी नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों ने पीएफ नहीं कटने का भी आरोप लगाया।

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पोर्टल के बजाय बायोमैट्रिक हाजिरी की मांग
कर्मचारियों ने मांग की कि उनकी उपस्थिति पोर्टल के माध्यम से दर्ज कराने के बजाय बायोमैट्रिक मशीन से लगवाई जाए। उनका कहना था कि हाजिरी की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, जिससे वेतन को लेकर किसी तरह की समस्या न आए।

प्राचार्य ने बताई वेतन कटौती की वजह
हंगामे की सूचना पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्राचार्य ने बताया कि कुछ कर्मचारी काफी दिनों तक ड्यूटी से गायब रहते हैं और अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं कराते। इसी वजह से उनके वेतन में कटौती की समस्या आती है।

सीओ ने कराया शांत, प्रतिनिधिमंडल ने की वार्ता
कर्मचारियों के हंगामे की सूचना पर सीओ कोतवाली संग्राम सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को शांत कराया। इसके बाद पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल प्राचार्य से वार्ता करने पहुंचा। कर्मचारियों की मांगों और वेतन संबंधी समस्याओं को लेकर बातचीत की गई।
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