सहारनपुर निवासी एमबीबीएस इंटर्न छात्र संजीत सिंह की मौत के बाद से लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में हालात बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में प्राचार्य जहां मेडिकल कॉलेज में आम मरीजों के इलाज की व्यवस्था सुचारु रखने की कोशिशों में जुटे हैं। जबकि जूनियर डॉक्टर जिद पर अड़े हैं। प्राचार्य द्वारा सुझाए गए त्रिस्तरीय कार्रवाई के फार्मूले को भी नकारते हुए जूनियर डॉक्टर ईएमओ डॉ. सचिन को सस्पेंड कराने और 24 घंटे में उनका आवास खाली कराने की रट लगाए रहे। जिसके चलते दिन भर चली वार्ता देर रात विफल हो गई। अब कॉलेज प्रशासन कड़े फैसले लेने पर विचार कर रहा है।
अपील के बाद भी नहीं पसीजा दिल
तीन दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को मेडिकल कॉलेज खुला तो दोपहर एक बजे कॉलेज के हॉल में शोक सभी रखी गई। जिसमें एमबीबीएस छात्र और जूनियर डॉक्टरों से लेकर कॉलेज के स्टाफ ने हिस्सा लिया। दो मिनट का मौन रखकर संजीत सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने दोनों पक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि असल मायने में अगर हम संजीत को श्रद्धांजलि दे सकते हैं तो उसके लिए जरूरी है कि एमबीबीएस छात्र और जूनियर डॉक्टर आपसी मतभेद भुलाकर कॉलेज हित के लिए मरीजों का इलाज कराएं। ताकि संजीत की आत्मा की शांति के लिए सभी लोग दुआ दे सकें। लेकिन प्राचार्य की अपील का कोई असर नहीं दिखा।
यह थे त्रिस्तरीय फैसले
सारे मामले को निपटाने के लिए प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने एमबीबीएस छात्र और जूनियर डॉक्टरों की मांगों को ध्यान पर रखकर तीनों स्तर पर कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखा।
1.ईएमओ डॉ. सचिन से सारे चार्ज वापस लेते हुए तत्काल प्राचार्य कार्यालय से अटैच किया जा रहा है। साथ ही उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र भेजा जा रहा है।
2.संजीत के इलाज में लापरवाही करने वाले जूनियर डॉक्टरों और मौत के बाद मारपीट की घटना में शामिल डॉक्टरों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई।
3.डॉ. तुंगवीर सिंह द्वारा न देखे जाने के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा जा रहा है। जो भी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट आएगी, उसके बाद कार्रवाई कर दी जाएगी।
(हालांकि, इमरजेंसी को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर चिकित्सा सेवा प्रभावी रहती हैं, क्योंकि जूनियर डॉक्टर महज खानापूर्ति के लिए ड्यूटी कर रहे हैं)
एडी ने दिखाई गंभीरता
मेडिकल कॉलेज में चल रही उठापटक के बीच जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर एडी डॉ. मंजू वैश्य शर्मा से मिले। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा की तरफ से तैनात किए गए डॉ. सचिन मेडिकल कॉलेज में माहौल बिगाड़ रहे हैं। बीती कई बड़ी घटनाओं में वो शामिल रहे हैं। उन्होंने एमबीबीएस छात्र की मौत के बाद साथी छात्रों को उकसाया। जिसके बाद इमरजेंसी में मारपीट हुई। इसलिए उन्हें तत्काल हटाया जाए। जिस पर एडी ने कहा कि क्या यह बात आपने वहां पर सीएमएस और प्राचार्य से कही। अगर उनकी तरफ से हटाने की संस्तुति की जाती है तो उस पर विचार किया जाएगा। लेकिन आप सभी लोग अपना स्पष्ट मांग पत्र तैयार करके दो, ताकि उस पर जांच की जा सके।
निजी हितों पर उतरे जूनियर डॉक्टर
दिन भर के घटनाक्रम के बाद सोमवार देरशाम प्राचार्य के साथ जूनियर डॉक्टरों की फिर से वार्ता हुई। जिसमें डॉक्टरों ने कहा कि हम लोग मारपीट करने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं चाहते हैं। लेकिन ईएमओ को सस्पेंड कर कैंपस से उनका आवास खाली कराया जाए। इसके बाद प्राचार्य ने एमबीबीएस के छात्रों को बुलाकर पूछा कि क्या संजीत की मौत के बाद ईएमओ ने आप लोगों को मारपीट के लिए उकसाया था। जिस पर छात्रों ने कहा कि उन्होंने हमसे ऐसा कुछ नहीं कहा। कैंपस में हर वक्त उन्होंने हमारी बात सुनकर समाधान किया। जिस पर प्राचार्य ने जूनियर डॉक्टरों से ही पूछ लिया कि अब बताओ? किस आधार पर ईएमओ को हटाया जाए। लेकिन जूनियर डॉक्टर फिर भी डॉ. सचिन के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।