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मेडिकल के दो विभाग, जहां हर 10वां मरीज तोड़ता है दम

Mon, 22 Feb 2016 01:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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आंकड़े तल्ख हैं, लेकिन सच हैं। अक्सर मारपीट, हंगामे और इलाज में लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रहने वाले लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौतों का आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस कॉलेज के दो ऐसे अहम विभाग हैं, जहां सबसे ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। इन दोनों विभागों में मरीजों की मौत का आंकड़ा भी सबसे ज्यादा है। हालांकि, मौत पर किसी का वश तो नहीं, लेकिन इन आंकड़ों और इसके पीछे का सच जाना जाए तो लगता है कि यहां शायद मरीजों की जान बेहद सस्ती समझी जा रही है। ऐसे में यह मान लेना भी बेमानी होगा कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को सही तरीके से इलाज मिल रहा है।
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यह मांगी थी जानकारी
एडवोकेट जयकिशन ने सूचना का अधिकार के तहत मेडिकल कॉलेज स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राजकीय चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक से चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। पहले दो बिंदुओं में पूछा गया कि मेडिसिन और सर्जरी विभाग में कितने मरीज बीते साल (वर्ष-2015) भर्ती हुए। उनमें से कितने मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई। अन्य दो बिंदुओं में पूछा गया था कि मेडिसिन में किस चिकित्सक के अंदर कितने मरीजों की मौत हुई और सर्जरी के अंदर कितने। चिकित्सकों के नाम और मौतों की संख्या का भी पूरा ब्यौरा मांगा गया था।

यह मिली सूचना
आरटीआई के जवाब में प्रमुख अधीक्षक ने सूचना दी कि दोनों विभागों में बीते साल 6612 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 649 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई। ये दोनों वो विभाग हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं और करीब 60 से 70 फीसदी केस मेडिसिन और सर्जरी के होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि  मेडिसिन विभाग में 4900 मरीज भर्ती हुए और 512 मरीजों की इलाज के दौरान जान चली गई। इसी तरह से सर्जरी में 1712 मरीज भर्ती हुए और 137 की इलाज के दौरान मौत हुई।
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नीयत पर भी उठे सवाल
आरटीआई के तहत बाकी दो बिंदुओं पर जवाब गोल कर दिया गया। इन दोनों विभागों में किस चिकित्सक के अंडर में कितने मरीजों की मौत हुई और सर्जरी के अंदर कितने। चिकित्सकों के नाम और मौतों की संख्या का पूरा ब्योरा प्रमुख अधीक्षक ने विभागों से प्राप्त नहीं होना बताया। इससे साफ होता है कि अस्पताल प्रशासन कुछ छिपाने की कोशिश में लगा है।

फिर कहां है कमी
मेडिकल कॉलेज में अब फैकल्टी की कोई कमी नहीं है। 140 स्वीकृति पदों में से 120 से अधिक पदों पर फैकल्टी मौजूद हैं, जो स्पेशियलिटी और सुपर स्पेशियलिटी स्तर के हैं। इसी तरह से 150 जूनियर रेजीडेंट और सीनियर रेजीडेंट भी कॉलेज के पास है।

आरोपों में दम
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज न मिलने के आरोपों को एमबीबीएस इंटर्न संजीत सिंह की मौत से बल मिलता है। एमबीबीएस छात्रों ने आरोप लगाया था कि रात को सिर्फ जेआर-1 ही ड्यूटी पर रहते हैं। बाकी सभी ऑन कॉल पर चले जाते हैं। जबकि, सीनियर फैकल्टी मेंबर ही ऑन कॉल रह सकते हैं।
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