पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्याकांड के दौरान हुए दंगे की आग मेरठ तक भी पहुंची थी। जिसमें कई परिवार झुलसे थे। लोगों ने आगजनी भी की थी। जिसके कारण एक परिवार ने तो उसी समय मेरठ छोड़ दिया था। जो आज तक वापस नहीं लौटा है। इतना ही नहीं सिखों के कई संस्थानों में आग लगाने का प्रयास किया गया था।
1984 में कुछ लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी। उस समय आरोप सिखों पर लगा था। जिसके कारण पूरे देश में दंगे भड़क गए थे। जिसमें सिखों को काफी नुकसान भी हुआ था। यह आग उस दिन शाम साढ़े तीन बजे मेरठ सोतीगंज की तरफ पहुंच गयी थी। अपने स्कूटर पर सवार होकर थापर नगर अपने घर वापस लौट रहे स. अमरीक सिंह बताते हैं कि जब वह सदर दाल मंडी से गुजर रहे थे तो लोगों ने हमला बोल दिया था। हॉकी डंडों से मारना शुरू कर दिया था। स्कूटर की टंकी खोलकर आग लगाने का प्रयास किया था। थाना सदर में उस समय बंगाली इंस्पेक्टर तैनात थे।
वहीं सूचना पर उन्होंने पुलिस को भेजा। उस समय पुलिस के सहयोग से जान बची। इनका कहना है कि उसी दिन कुछ लोगों ने थापर नगर में भाटिया प्रोविजन स्टोर को आग के हवाले कर दिया था। दंगा शांत होने के तुरंत बाद वह शहर छोड़कर चले गए थे। दंगाइयों ने नैयर पैलेस और सोतीगंज के कुक्कू प्रोविजन स्टोर को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। सोतीगंज के मुसलमान इकट्ठा होकर सिखों के पक्ष में आ गए थे। तो कुक्कू प्रोविजन स्टोर को आग लगाने में लोग सफल नहीं हो पाए थे।
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