पहले भी पूरी हो चुकी है एक मन्नत
अनिल का कहना है कि यह उनकी पहली विशेष कांवड़ यात्रा नहीं है। इससे पहले वह अपने भाई के विवाह की मनोकामना लेकर माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार ले गए थे। इससे पहले दादा-दादी को भी कांवड़ में बैठाकर यात्रा करा चुके हैं।
भाई की शादी के बाद और मजबूत हुआ विश्वास
अनिल के अनुसार, उनके भाई का विवाह जुलाई 2026 में सकुशल संपन्न हो गया, जिसे वह अपनी मन्नत पूरी होने से जोड़ते हैं। इसके बाद उनका भगवान शिव के प्रति विश्वास और गहरा हो गया। अब वह संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह कठिन दंडवत कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
श्रद्धालु कर रहे मन्नत पूरी होने की प्रार्थना
रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु और राहगीर अनिल की कठिन तपस्या और अटूट श्रद्धा को देखकर उनकी सराहना कर रहे हैं। कई लोग उनकी मनोकामना पूरी होने की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दे रहे हैं।