डॉ. शर्मा ने बताया कि टीम में फ्लोरेंस कैथरीना, दारा ओशेरा और गोनजलो ग्रेंडो ल्यूस ने हरियाणा, पंजाब, वेस्ट यूपी में हो रही बासमती की फसल का खेतों में जाकर अध्ययन किया और किसानों से भी बात की।
इन यूरोपियन देशों में जाता है बासमती
यूरोप, आस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, नीदरलैंड, स्वीडन, इंग्लैंड, डेनमार्क, इटली, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन समेत कई देशों में बासमती का निर्यात किया जाता है। यूरोपियन यूनियन के नए नियम के मुताबिक आयात की जाने वाली बासमती में पेस्टीसाइड का प्रभाव नहीं होना चाहिए।
यूपी के इन जिलों में होती है फसल
यूपी के मेरठ, आगरा, अलीगढ़, बदायूं, बागपत, बरेली, बिजनौर, बुलदंशहर, एटा, इटावा, फरुखाबाद, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हाथरस, जेपी नगर, कन्नौज, मैनपुरी, मथुरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, औरेया, पीलीभीत, रामपुर, शाहजांहपुर, सहारनपुर, शामली, हापुड और संभल आदि में बासमती की फसल होती है।
अच्छी क्वालिटी के कारण बढ़ी मांग
यूरोप में हर साल करीब चार लाख टन बासमती का निर्यात होता है। इसकी मांग बढ़ रही है और क्वालिटी भी अच्छी है, लेकिन वहां पर पेस्टीसाइड की समस्या है, जिसे कम या खत्म करने को लेकर टीम ने मंथन किया है और यह टीम अध्ययन रिपोर्ट यूरोपियन यूनियन को देगी।
-डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी व प्रधान वैज्ञानिक, बीईडीएफ मोदीपुरम।
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