लोकसभा चुनाव में भाजपा और गठबंधन के बीच वोटर पूरी तरह सिमट गए। जातीय और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की लहर ऐसी चली कि मतदाता इनके अलावा कहीं और बंटते हुए नजर नहीं आए। सभी पांचों विधानसभाओं के बूथवार मतगणना के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मुस्लिम-एससी गठबंधन ने पूरे जोश के साथ मतदान किया। अन्य जातियों का वोट पूरी तरह भाजपा के पक्ष में जाता नजर आया।
कुछ गांव ऐसे जरूर रहे, जहां भाजपा अपने पक्ष में वोट मान रही थी, वहां पर गठबंधन को वोट जाता नजर आया। लेकिन कुछ बड़े नेताओं की उपेक्षा के चलते जैसी उम्मीद की जा रही थी कि मुस्लिम वोट निष्क्रिय या कांग्रेस प्रत्याशी पर जा सकता है, तो ऐसे सारे कयास धरे रह गए। किसी भी नेता की जनता ने नहीं सुनी और अपने मन से खुलकर मतदान किया।
किठौर में पूरी तरह रहा ध्रुवीकरण
किठौर सीट के जातीय आंकड़े पहले से गठबंधन के पक्ष में है। क्योंकि इस सीट पर मुस्लिम सबसे ज्यादा संख्या में है तो दलित वोट मिलाकर वह कुल वोटरों का करीब 55 प्रतिशत हो जाते हैं। इन दोनों ने मिलकर मतदान में उत्साह भी ज्यादा दिखाया। हालांकि भाजपा के वोट बैंक ने भी उत्साह से मतदान किया। लेकिन वह मुस्लिम और दलितों के जितना उत्साह चुनाव में नहीं दिखा सका।
यही कारण रहा कि यहां पर भाजपा को 21 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त मिली। किठौर विधानसभा के मुस्लिम बहुल गांव शाहजहांपुर, किठौर, मुंडाली, इंचौली, राधना इनायतपुर, कायस्थ बड्ढा, जई, नंगला साहू, पचपेड़ा, अजराड़ा, जिसौरी, गोकुलपुर आदि तमाम गांव ऐसे रहे जहां पर भाजपा अधिकांश बूथों पर सौ का आंकड़ा भी नहीं पकड़ सकी।
जबकि ठाकुर, जाट, गुर्जर, त्यागी, अति पिछड़ा वर्ग बहुल गांवों में पूरी तरह भाजपा के पक्ष में मतदान सिमट गया। पसवाड़ा, बहलोलपुर, दबथला, ऐतमादपुर, रहदरा, मवी, कुआंखेड़ा, माछरा, खरखौदा, पांची, कैली आदि तमाम गांव ऐसे रहे जहां पर पूरी तरह भाजपा का कमल खिला। लेकिन वोट प्रतिशत कम होने से भाजपा मात खा गई।