लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में बने गठबंधन की मजबूती के लिए बसपा भी सपा की तरह रालोद के लिए एक सीट छोड़ सकती है। बसपा की इस पहल से न केवल रालोद के बेस वोटरों में सकारात्मक संदेश जाएगा, बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता का भी आधार बनेगा। बताया जा रहा है कि बसपा रणनीतिकारों ने पार्टी सुप्रीमो तक क्षेत्र से उठ रही मांग का फीडबैक पहुंचा दिया है।
सपा और बसपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गत 12 जनवरी को साझा प्रेस कांफ्रेंस कर गठबंधन की घोषणा की थी। इसमें सपा और बसपा ने 80 सीटों में से 38-38 सीटों पर लड़ने के अलावा दो सीटें अन्य दलों को देने और दो सीटों रायबरेली, अमेठी पर प्रत्याशी नहीं उतारने की बात कही थी। प्रेस कांफ्रेंस में रालोद का नाम नहीं लेने पर गठबंधन में उसके रहने या नहीं रहने के सवाल उठने लगे थे। लेकिन बाद में बताया गया कि छोड़ी गई दो सीटें रालोद की है, जबकि रालोद ने पांच सीटों की मांग कर गठबंधन में पेंच फंसा रखा है।