स्मार्ट सिटी की दौड़ शुरू होने से पहले ही मेरठ के साथ धोखा होना शुरू हो गया था। सोची समझी राजनीति के तहत रायबरेली को मेरठ से ज्यादा अहमियत दे दी गई थी। जबकि किसी भी पैमाने पर रायबरेली मेरठ के सामने ठहरता तक नहीं।
स्मार्ट सिटी मिशन में उत्तर प्रदेश के 13 शहरों के चयन के लिए 29 जुलाई 2015 को केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की कमेटी ने लखनऊ में प्रजेंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें यूपी के 14 महापौर, नगरायुक्त और 48 नगर पालिका अधिकारियों ने अपने-अपने शहर की उपलब्धियां गिनायी थीं। प्रजेंटेशन में समिति ने प्रत्येक शहर को उनके कार्य के आधार पर अंक दिए थे। उसी दिन शाम को जारी विज्ञप्ति में मेरठ को 75 अंक देकर 13वें स्थान पर रखा था। जिसको मीडिया ने प्राथमिकता पर प्रकाशित भी किया था। लेकिन रातोंरात ही स्मार्ट सिटी की सूची से छेड़छाड़ करके मेरठ के साथ विवाद उत्पन्न करते हुए रायबरेली के अंक भी 75 दर्शा दिए गए। जिसके तहत रायबरेली को 13 ए वरीयता क्रम देकर आगे कर दिया गया जबकि मेरठ को 13 बी पर लाते हुए पीछे कर दिया गया। उप्र सरकार ने 29 जुलाई 2015 की रात्रि में ही मेरठ के साथ सौतेला व्यवहार करने की नींव रखकर 30 जुलाई 2015 से धोखे की शुरूआत कर दी थी।
यहां खायी थी प्रजेंटेशन में मात
- निगम प्रशासन नहीं बढ़ा सकता टैक्स और वसूली
- शहर को अतिक्रमण मुक्त भी नहीं करा पाए
- लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों को दंडित करना भी थी दूर की कौड़ी
- शहर के प्रत्येक मकान में नहीं हैं शौचालय
- पुराने शहर में नए मॉडल के साथ आवासीय और कॉमर्शियल भवनों का निर्माण नहीं
- शहर में ड्रेनेज सिस्टम भी ठीक नहीं
- सीवर ट्रीटमेंट पर सरकार के 300 करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी नालियों में बहता है मल
- पर्याप्त नहीं होती नाली-नालों की सफाई
- शहर की सड़कों पर भी पसरी रहती है गंदगी
नीति आयोग के सामने भी फेल
मेरठ। केंद्र सरकार ने दिल्ली में नीति आयोग की बैठक बुलायी थी। जिसमें तत्कालीन नगरायुक्त ने भाग लेकर मेरठ स्मार्ट सिटी का पक्ष रखा था। हर पहलु पर मेरठ की उपलब्धियों को सराहा गया था। इसके बाद स्मार्ट सिटी को लेकर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने तीन सितंबर 2015 को नई दिल्ली में कार्यशाला आयोजित की थी। जिसमें मेरठ के नगरायुक्त और महापौर ने प्रमुखता से अपना पक्ष रखा था।
इन उपलब्धियों को भी किया नजरअंदाज
- मेरठ एनसीआर का सबसे बड़ा शहर है, आबादी 20 लाख है
- देश की राजधानी नई दिल्ली की सीमा से सटा है
- पुरानी कमिश्नरी है, जिसको पश्चिम उप्र की राजधानी के नाम से भी जाना जाता है
- मेरठ नगर निगम है, क्षेत्रफल में भी काफी बड़ा
- मेरठ नगर निगम के पास सफाई, पानी और निर्माण के संसाधनों की भरमार है,
- 1857 की क्रांति में मेरठ इतिहास के पन्नों में दर्ज है
- मेरठ एजूकेशनल हब है। यहां दो सरकारी और दो प्राइवेट विवि हैं। एक सरकारी और एक प्राइवेट मेडिकल कालेज, 60 से अधिक व्यावसायिक शिक्षण संस्थान हैं
- मेरठ शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के बिंदु ग्रीन बेल्ट के लिए भूमि उपलब्ध है
- मेरठ में मेट्रो ट्रेन का कार्य शुरू होने वाला है
- मेरठ में जेएनएनयूआरएम योजना संचालित है
- मेरठ में अमृत योजना भी लागू
कब क्या हुआ
29 जुलाई 2015 : लखनऊ में मुख्य सचिव उप्र सरकार के सामने प्रजेंटेशन
30 जुलाई 2015 : उप्र सरकार ने मेरठ के साथ रायबरेली का नाम जोड़कर धोखे की शुरूआत
03 सितंबर 2015 : दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में मेरठ का हुआ प्रजेंटेशन
15 जून 2016 : कंसलटेंट और नगर निगम प्रशासन ने शुरू किया था स्मार्ट सिटी का प्रपोजल
28 जून 2016 : राज्य सरकार के सामने रखा गया था प्रपोजल,
30 जून 2016 : नगरायुक्त और कंसलटेंट ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सौंपा था प्रपोजल,
- नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव पास किया, भरे थे संकल्प पत्र
- सीएम से मिले थे संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता
- व्यापारी नेता और छात्रों ने सपा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भेजा था राज्य सरकार को ज्ञापन
- दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से मिले थे सांसद, विधायक और महापौर
- लगातार 15 दिन तक नगर निगम का पूरा अमला, सामाजिक, व्यापारिक संगठन, भाजपा जनप्रतिनिधि और शहर की जनता ने खुलकर की थी वोटिंग