केस- 1
मूलरूप से जिला गाजियाबाद के गांव मोरटा निवासी ज्योति पत्नी स्व. जितेंद्र ने बताया कि ससुर व देवर ने उसकी 70 बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है। वह अपनी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए थाना पुलिस से लेकर तमाम उच्चाधिकारियों से गुहार लगा चुकीं हैं, लेकिन उसे कहीं भी इंसाफ नहीं मिला है। सदर तहसील में भी वह करीब 10 बार शिकायत दें चुकी है।
अधिकारी उन्हें खरखौदा थाने जाने की बात कहते है और थाना पुलिस उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के पास भेज देती है। छह माह से थाना और तहसील के ही चक्कर लगा रही हैं। इसके बावजूद उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
केस- 2
सिवालखास निवासी रशीदा बेगम पत्नी शकील ने बताया कि गांव के ही रहने वाले कुछ लोगों ने नगर पंचायत की भूमि पर कब्जा कर मकान बना रहे है। आरोप था कि इन लोगों ने नाली की पटरी और रास्ते पर भी निर्माण करने की कोशिश की है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। रशीदा बेगम ने तहसीलदार रामेश्वर दयाल को शिकायत देते हुए मांग की है कि उच्चाधिकारियों को भेजकर नगर पंचायत की जमीन पर हो रहे कब्जे को रूकवाया जाए और जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए। इन्हें भी यहां से संबंधिक विभाग के अधिकारी के पाास भेज दिया गया।
केस- 3
गांव भूडबराल निवासी सुधीर गुर्जर एडवोकेट ने बताया कि भूडबराल-बहादुरपुर लिंग मार्ग की चौडाई 60 फीट है। आरोप है कि भूडबराल के एक परिवार ने इस रास्ते पर कब्जा कर संकरा कर दिया है। जिस कारण इस लिंक मार्ग की चौडाई अब 30 फीट रह गई है। उन्होंने विरोध किया तो उक्त परिवार के लोगों ने उन्हें भुगत लेने की धमकी दी है। अधिवक्ता ने तहसीलदार को शिकायत देकर लिंक मार्ग को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।
जो मामले कोर्ट में विचाराधीन होते हैं, उनका निस्तारण तहसील दिवस में नहीं होता। अन्य केसों के तत्काल निस्तारण के लिए पूरी कोशिश की जाती है। -रामेश्वर दयाल, तहसीलदार, सदर