मेरठ में हत्या के आरोप में चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सजा काट रही 39 वर्षीय रोशनी का एक बेटा भी है। जब रोशनी को सजा हुई तब उसका बेटा बंटी तीन साल का था (मां, बेटे के काल्पनिक नाम)। बंटी तब से रोशनी के साथ जेल में ही रह रहा है। अब वह करीब साढ़े चार साल का हो गया है। खास बात यह कि बंटी की दिनचर्या भी सामान्य बच्चों की तरह है। वह स्कूल जाता है। उसकी मां उसे खाने का टिफिन भी देती है। लौटकर वह पढ़ता और बच्चों के साथ खेलता है।
जेल में बंटी के अतिरिक्त छह बच्चे और हैं। लेकिन इनके खेल निराले हैं। ये मासूम न तो घर-घर खेलते न ही आंख-मिचौली। टीवी पर कार्टून भी नहीं देखते। इनका पसंदीदा खेल है जेल-जेल। जेल में तैनात पुलिसकर्मियों की खाकी वर्दी देखकर यह भी प्रभावित होते हैं। कोई बच्चा पुलिस वाला साहब बनता है और हाथ में खिलौना बंदूक लेकर चलता है, तो कोई बैरक के अंदर अपराधी बनकर खड़ा हो जाता है। पुलिस वाला बनकर एक-दूसरे से पूछताछ भी करते हैं। पूछताछ के नाम पर कोई एबीसीडी सुनता है तो कोई गिनती। उनकी यह अठखेलियां वहां पर बंद महिला बंदियों और सुरक्षाकर्मियों को भी गुदगुदाती रहती हैं।