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इथाइल-मिथाइल के फेर में जा रही लोगों की जानें, सेटिंग के खेल से बिक रहा ‘मौत का जाम’ 

Sun, 10 Feb 2019 05:10 PM IST
Vikas Kumar अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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कुछ यूं भट्ठी जलाकर बनाई जाती है कच्ची शराब। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल तक नकली और जहरीली शराब का जाल फैला हुआ है। इसमें मेरठ का खादर जहां कच्ची शराब के लिए कुख्यात है, तो छोटी-छोटी फैक्टरियों में देशी और विदेशी नकली शराब तैयार हो रही हैं। इस अवैध धंधे से जुड़े ये माफिया सीधे-सीधे मौत का जाम तैयार कर रहे हैं। 

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इन माफियाओं को शराब बनाने में प्रयोग होने वाली इथाइल अल्कोहल की जगह मिथाइल अल्कोहल भी प्रयोग करने से गुरेज नहीं है। अहम बात ये है कि इस पूरे धंधे को पुलिस और आबकारी विभाग की साठगांठ से अंजाम दिया जा रहा है।

यही कारण है कि इस जहरीली शराब को पीने से जब इक्का दुक्का मौत होती हैं, तो कोई शोर नहीं होता, लेकिन जब सहारनपुर जैसी बड़ी घटना घटती है तो पूरा सरकारी तंत्र जाग उठता है। लेकिन इन मौत के सौदागरों पर प्रभावी शिकंजा नहीं कसा जाता। 

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इथाइल अल्कोहल का प्रयोग शराब बनाने में किया जाता है। इसके लिए इसकी तीव्रता घटानी पड़ती है। इसी तरह का दूसरा पदार्थ मिथाइल अल्कोहल है, जो जहर का दूसरा रूप है। चूंकि, दोनों का मिलता-जुलता नाम है और ‘अल्कोहल’ शब्द भी जुड़ा है, इसलिए लोग भ्रम में या जानबूझकर मिथाइल अल्कोहल में पानी मिलाकर इसका शराब की जगह प्रयोग कर लेते हैं।

मिथाइल अल्कोहल रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन रसायन है और बेहद घातक है। इसका प्रयोग पेंट, थिनर, कीटनाशक आदि में होता है। लेकिन शराब माफिया इसे शराब बनाने में भी प्रयोग करते हैं। 

टैंकरों से करते हैं चोरी
दरअसल, मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों से इथाइल और मिथाइल अल्कोहल दोनों सप्लाई किए जाते हैं। टैंकरों के चालक, क्लीनर कच्चे लालच में मिथाइल अल्कोहल को टैंकर से निकालकर बेच देते हैं। इसके खरीददारों में अवैध शराब बनाने वाले लोग मुख्य रुप से होते हैं।

बहुत घातक है मिथाइल अल्कोहल
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. प्रदीप भारती का कहना है कि मिथाइल अल्कोहल का प्रयोग दिमागी कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे शरीर में सुन्नपन व अंधेपन की समस्या आ सकती है। थोड़ी मात्रा भी मौत का कारण बन सकती है।

कई जिलों में हुई हैं मौत
मिथाइल अल्कोहल के प्रयोग से गाजियाबाद और बुलंदशहर जिलों में कई साल पहले कई मौतें हो चुकी हैं। जबकि इसके सेवन से इक्का-दुक्का मौत होती रहती हैं। 

‘अमर उजाला’ ने किया था खुलासा 
अमर उजाला ने करीब दो साल पहले नकली शराब बनाने के कारोबार का स्टिंग कर खुलासा किया गया था। यह अवैध शराब फैक्टरी उन दिनों एक छोटे से मकान में कंकरखेड़ा और माधवमपुरम क्षेत्र में चल रही थी। जिसमें नकली शराब बनाने वाले महंगी विदेशी शराब तैयार कर बेच रहे थे। सूत्रों की मानें तो अभी भी जनपद में कई जगहों पर नकली देशी और विदेशी शराब तैयार की जा रही हैं। 

खादर की कच्ची शराब से ज्यादा है घातक 
गंगा खादर में तैयार होने वाली कच्ची शराब से ज्यादा घातक यह नकली देशी और विदेशी शराब है। क्योंकि इसमें सीधे मिथाइल अल्कोहल मिलाकर तैयार किया जाता है। जबकि कच्ची शराब बनाने में यूरिया, नौसादर आदि को खराब गुड़ में मिलाकर उसे सड़ाया जाता है और फिर उसे पकाकर उसकी भाप से शराब तैयार होती है। ऐसे में यह नकली शराब इस कच्ची शराब से कहीं ज्यादा घातक सिद्ध होती है। 

सेटिंग का है पूरा खेल 
जिस तरह टैंकरों से पेट्रोल और डीजल चोरी की घटनाएं होती हैं, उसी तरह मिथाइल अल्कोहल के टैंकरों से भी हाईवे किनारे के ढाबों पर अल्कोहल चोरी कर बेचा जाता है। लेकिन आज तक भी आबकारी या पुलिस विभाग ने इसके खिलाफ अभियान नहीं चलाया। इन टैंकरों का न तो औचक निरीक्षण किया गया और नही हाईवे पर खड़े इन टैंकरों की जांच की गई।
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सूत्रों के अनुसार टैंकरों से अल्कोहल चोरी होने के तय स्थान हैं। जहां पर पुलिस और आबकारी विभाग की साठगांठ से यह धंधा धड़ल्ले से होता है। यहां अल्कोहल चोरी का सबसे प्रमुख सेंटर मुजफ्फरनगर क्षेत्र है। जहां से पश्चिमी यूपी सहित उत्तराखंड भी सप्लाई होता है। 

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