150 टन कूड़े का हो रहा निस्तारण
शहर से रोजाना करीब 900 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन गांवड़ी प्लांट पर बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन से केवल 150 टन कूड़े का ही रोजाना निस्तारण हो रहा है। फिलहाल शहर से निकले कूड़े को लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड पर डाला जा रहा है। यहां भी कूड़े का पहाड़ खड़ा होता जा रहा है। बढ़ते कूड़े के पहाड़ों पर एनजीटी सख्ती कर चुकी है। एनजीटी के आदेश पर ही गांवड़ी में डंप कूड़े को खत्म किया जा रहा है।
जुर्माने से बचने के लिए यह करना होगा
लोगों को घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों आदि में नीले और हरे रंग के डस्टबिन रखने होंगे। हरे डस्टबिन में फल एवं सब्जी के छिलके, खराब भोजन, सब्जी और दही आदि गीला कचरा तो नीले डस्टबिन में प्लास्टिक, कागज, बोतल, पैकेट, डिब्बे और कपड़े आदि सूखा कचरा रहेगा। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में भी हरा और नीला डस्टबिन लगा है। लोगों को अपना कूड़ा इनमें अलग-अलग डालना होगा।
मेडिकल वेस्ट भी अलग
कूड़ा गाड़ियों में मेडिकल वेस्ट के लिए भी अलग से छोटा डस्टबिन रहेगा। लोगों को घरों के मेडिकल वेस्ट जैसे दवाई, इंजेक्शन, पट्टी, सिरींज आदि कूड़ा स्टाफ को एक अलग बैग में रखकर देनी होगी।
जन सहयोग जरूरी
नगर आयुक्त मनीष बंसल का कहना है कि शहर को स्वच्छ और हराभरा बनाना है तो हम सभी को सहयोग करना होगा। गीले और सूखे कूड़े के अलग-अलग कलेक्शन से बहुत बड़ी समस्या हल हो सकती है। लोग कूड़ा नाले और नालियों में फेंकने के बजाय कूड़ा वाहनों में व्यवस्थित तरीके से डालें। गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग नहीं देने पर जुर्माना वसूला जाएगा।