सरधना विधायक अतुल प्रधान समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंच गए। तब मौके पर काफी हंगामा हुआ। अस्पताल प्रबंधन का आरोप था कि विधायक और उनके समर्थकों ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ को डराया, धमकाया और पीटने की धमकी दी। विधायक और नवजात के परिजन बिना बिल दिए ही अस्पताल से चले गए। इस घटना से अस्पताल का स्टाफ और बाकी मरीज दहशत में आ गए।
अस्पताल के सिक्योरिटी इंचार्ज केहर सिंह की तरफ से विधायक अतुल प्रधान और नवजात के पिता जितेंद्र, चाचा और दादा समेत करीब 44 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच मेडिकल चौकी प्रभारी को सौंपी गई थी। मामले ने तूल पकड़ लिया और न्यूटिमा अस्पताल प्रबंधन के पक्ष में आईएमए आ गया।
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प्रेस कांफ्रेंस कर अतुल प्रधान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। दूसरी ओर विधायक ने चेतावनी दी थी कि मरीज के परिजनों की तहरीर पर यदि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो वह अनशन करेंगे। इस मुद्दे पर अतुल प्रधान को किसान संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला था।
10 नवंबर को विधायक ने कलक्ट्रेट में समर्थकों के साथ धरना दिया था। तीन दिन में मुकदमा खत्म न करने पर आमरण अनशन पर बैठने की एलान किया था। सीओ अरविंद चौरसिया का कहना है कि विवेचक ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। सीसीटीवी फुटेज में आवाज नहीं थी। अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दोबारा जांच कराई गई। विधायक के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है। अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच अभी जारी है।