सड़क दुर्घटना के बाद छह महीने कोमा में रहीं
बिजली विभाग में स्टेनोग्राफर पद पर तैनात फातिमा 2014 में सड़क दुर्घटना गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। वह छह महीने कोमा में रहीं। दोनों हाथ और पैर टूट चुके थे, जबकि पूरे शरीर में 194 टांके आए थे।
दो साल तक बेड रेस्ट के बाद जब वह उठीं तो व्हील चेयर का सहारा ही उनका जीवन बन गया। वह सामान्य से दिव्यांग हो चुकी थीं। दूसरी जिंदगी मिली तो उन्होंने 2017 में खेलों में किस्मत आजमाते हुए मेहनत शुरू की। कुछ अलग करने के जज्बे से उन्हें यह मुकाम मिला।
स्टेडियम प्रशासन की बेरुखी से प्रभावित हुआ अभ्यास
मोरक्को से अमर उजाला से फोन पर बात करते हुए फातिमा ने बताया कि कैलाश प्रकाश स्टेडियम में उन्हें अभ्यास से रोका गया। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी योगेंद्रपाल सिंह के सामने हाथ जोड़ने और पैर पकड़ने तक की मिन्नतें की, लेकिन उन्हें अभ्यास करने की इजाजत नहीं दी गई।
स्टेडियम प्रशासन की बेरुखी के कारण उनका 10-12 दिन का अभ्यास प्रभावित हुआ। उनका अभ्यास प्रभावित न होता तो मुख्य इवेंट भाला फेंक में भी पदक जरूर आता, क्योंकि 25 सेमी. से उनका कांस्य पदक रह गया। कहा पेरिस पैरालंपिक -2024 के क्वालिफाई करने के बाद अभी और मेहनत करनी होगी।