केंद्र-प्रदेश पर साधा निशाना
पीएफआई की तरफ से जारी प्रेसनोट में आरोप लगाया गया कि भीड़तंत्र की हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली और यूपी पुलिस ने कोई कारगर कदम नहीं उठाया। पिछले एक सप्ताह से शांतिपूर्ण अभियान में शामिल होने के कारण एक वर्ग के युवकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन युवकों को पॉपुलर फ्रंट के राष्ट्रीय अभियान में शामिल होने के कारण परेशान किया जा रहा है। जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक तरीके में रुकावट डालने के सिवा कुछ नहीं है। पीएफआई के सचिव अनीस अंसारी ने कहा कि नए दौर में हमने नहीं सुना कि कुछ लोग धार्मिक आस्थाओं के लिए गोमांस खाने या गाय रखने के आरोप में बेगुनाह लोगों की जान ले लेते हों। साल 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से 180 बड़े और 33 छोटे भीड़ के द्वारा हमले सामने आए हैं। जिनमें 50 से अधिक लोगों को मार डाला गया। भीड़ का शिकार बनने वालों में 56 प्रतिशत गरीब एक वर्ग के हैं।
...ये तो शुरुआत है
अनीस अंसारी ने प्रेस नोट में आरोप लगाए कि भीड़ तंत्र की हिंसक घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। झारखंड में तबरेज अंसारी जैसे कई नाम सूची में हैं। केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग की घटनाओं को न तो रोक पा रही है और न ही कोई कानून पास करना चाहती है। इससे एक वर्ग में भय का माहौल है। ऐसे माहौल को देखते हुए पीएफआई ने बेखौफ जिओ, बाइज्जत जीओ के नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। देशभर में पोस्टर अभियान, हैंडबिल का वितरण, नुक्कड़ सभा, सेमिनार और जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि पोस्टरों में पुलिस को ऐसा क्या विवादित लग रहा है जो पुलिस ने मेरठ और शामली से दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हम पुलिस-प्रशासन, केंद्र व यूपी सरकार से अपील करते हैं कि संगठन को निशाना बनाना और परेशान करना बंद कर दे।
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