धनीराम ने कहा कि देर से मिले न्याय का अर्थ- न्याय की हत्या होने जैसा है। देश के तमाम न्यायालयों को जल्दी से जल्दी मुकदमे निपटाने का आदेश देने वाला सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे को अपील के सात साल बाद भी यदि इस प्रकार टालता है, तो क्या यह उचित समय नहीं है कि अध्यादेश अथवा संसद द्वारा कानून बनाने की मांग उठायी जाये? इंदिरा गांधी के चुनाव का मसला सुप्रीम कोर्ट में अटका था, तब भी उन्होंने संसद से अपने पक्ष में कानून बनवाकर मुकदमा जीता था। मंदिर मुद्दा कोर्ट में लंबित होते हुए भी उसके पक्ष में कानून क्यों नहीं बन सकता?
उन्होंने राम मंदिर के इतिहास और साक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि अब संतों का धर्मादेश है कि अयोध्या में प्राचीन राम मंदिर का भव्य स्वरूप पुन: प्राप्त किया जाए। श्रीराम के समान ही श्रीराम जन्मस्थान हिंदुओं का आराध्य देव है। पूरे देश में अयोध्या, नागपुर और बैंगलूरु में 25 नवंबर और दिल्ली के रामलीला मैदान में 9 दिसंबर को रिकार्ड तोड़ भीड़ जुटाकर भावनाओं का प्रदर्शन करना होगा। हिंदू समाज के मान-सम्मान के साथ संघ और समविचारी संगठन कमर कसकर खड़े हैं, यह सिद्ध करना होगा।
ये हुईं घोषणाएं
- 9 दिसंबर को राम मंदिर निर्माण को 10 लाख हिंदू पहुंचेंगे दिल्ली
- केंद्र सरकार पर बनाया जायेगा अध्यादेश लाने या कानून बनाने का दबाव
- मेरठ प्रांत से 3.50 लाख लोगों को दिल्ली लेकर जाने का लक्ष्य हुआ तय
पुन: पाना है राष्ट्रीय गौरव: टोंक
संघ के क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टोंक ने समापन सत्र में कहा कि भारत के राष्ट्रीय गौरव को पुन: पाने के लिये राम मंदिर का पुनर्निर्माण जरूरी है। बाबर के सेनापति ने मंदिर तोड़कर भारत के गौरव पर चोट की थी। भारत की अस्मिता को कुचला था। भारतीयों को गुलाम होने का निरंतर आभास कराया था। अब समय है, वह राष्ट्रीय अपमान धो दिया जाए।
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