शव के पास से पुलिस को एक मोबाइल फोन मिला था, जिससे दोनों सिम गुम थे। परिजनों ने कपड़ों और शरीर के निशानों से उसकी पहचान की थी। घटना से क्षुब्ध ग्रामीणों ने शव मेरठ-परीक्षितगढ़ मार्ग पर रखकर जाम लगा दिया था और अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था।
कई घंटे की जद्दोजहद के बाद पुलिस ने समझाकर अंतिम संस्कार कराया था। आरोपियों की गिरफ्तारी और सिर की बरामदगी को लेकर कई दिन तक पंचायत और धरना-प्रदर्शन का सिलसिला चला था। विवेचना के दौरान आरोपियों के नाम प्रकाश में आए थे। उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस ने खेत में दबा सिर और तलवार बरामद करते हुए जेल भेज दिया था। पुलिस का दावा था कि पूछताछ में फहमीद ने बताया उसकी विवाहित बेटी को दीपक परेशान करता था।
बेटे की आत्मा को मिलेगी शांति, वजह स्पष्ट नहीं
कोर्ट के फैसले के बाद दीपक के पिता धीरेंद्र त्यागी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि दोषियों को उनके किए की सजा कोर्ट ने दे दी। कोर्ट के फैसले से वह संतुष्ट हैं। उम्मीद है कि इससे उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। इकलौते बेटे को खोने का गम जिंदगीभर रहेगा। दीपक के जीजा विशांत त्यागी ने कहा कि कोर्ट के निर्णय से वह संतुष्ट हैं, लेकिन दीपक की हत्या की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस ने जो दावा किया था, परिजनों को उस पर अभी भी विश्वास नहीं है।