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मेरठ मुद्रा महोत्सव...प्रदर्शनी ने सुनाई इतिहास की कहानी

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मुद्रा महोत्सव में शामिल पुराने जमाने के बाजू बंद
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मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में आयोजित मुद्रा महोत्सव 2025 ने इतिहास, संस्कृति और पुरातन कला के प्रेमियों को एक अनूठा मंच दिया। महोत्सव में सिक्कों, नोटों और एंटीक वस्तुओं की प्रदर्शनी ने न केवल इतिहास को जीवंत किया, बल्कि आगंतुकों को प्राचीन काल की सभ्यताओं, शासकों और व्यापारिक व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी। प्रदर्शनी में मेरठ के भी पांच सिक्के विक्रेताओं ने भी स्टॉल लगाए।
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नदियों की खुदाई से मिलीं 2500 साल पुरानी मुद्राएं
महोत्सव में प्रदर्शित सिक्कों और नोटों ने प्राचीन और मध्यकालीन भारत के साथ-साथ विश्व इतिहास की झलक पेश की। उत्तराखंड से आए अर्पित ने 2500 साल पुरानी मुद्राएं दिखाईं। ये मुद्राएं नदियों में खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं। जिनमें मुगल काल, सुल्तान काल और प्राचीन सभ्यताओं की मुद्राएं शामिल थीं। इनमें चोल वंश, विजयनगर साम्राज्य और अन्य प्राचीन सभ्यताओं की मुद्राएं भी प्रदर्शित की गईं।
- 1950 तक भारत में छपते थे पाकिस्तान के नोट
महोत्सव में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए। पुराने सिक्के, नोट और एंटीक वस्तुओं की कीमत 5000 रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक रही। अर्पित ने बताया कि इनमें ब्रिटिश और मुगल काल के सिक्के, 1850 से 1947 के बीच के नोट और अन्य दुर्लभ वस्तुएं जिसमें सोना, तांबा, पीतल की वस्तु शामिल रहीं। उत्तराखंड से आए अर्पित अग्रवाल ने बताया कि 1950 तक भारत में ही पाकिस्तान और बर्मा के नोट छपते थे, जिन पर फॉर पाकिस्तान लिखा होता था।
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- आजादी के बाद का पहला दो रुपये का नोट
प्रदर्शनी में आजादी के बाद 1947 में छपे भारत के दो रुपये के नोट ने सभी का ध्यान खींचा। आज के समय में इस नोट की कीमत 4500 रुपये बताई गई। इसके अलावा, ब्रिटिश और मुगलकाल के सिक्कों और नोटों ने भी इतिहास प्रेमियों को आकर्षित किया। इनमें से कई नोट आठ भाषाओं में लिखे गए थे, जैसे पंजाबी, तमिल, गुजराती और तेलुगु, जो उस समय की भाषायी विविधता को दर्शाते हैं।
- दुर्लभ वस्तुओं का आकर्षण
महोत्सव में दो लाख रुपये की कीमत वाला एक ओपल (रत्न) मुख्य आकर्षण रहा। इसके अलावा, मुगल काल का पेपर काटने का चाकू, मछली के आकार की आरती की थाली और अंग्रेजों के समय का 24 हजार रुपये का चांदी का पर्स दर्शकों के लिए कौतूहल का विषय रहा। गुजरात के चालुक्य, बड़ौदा स्टेट के सिक्के, गजनी के समय के सिक्के, गुप्तकाल में प्रयोग होने वाले सिक्के भी दिखाए गए।
- 786 नंबर के नोटों से बनाई विशाल पतंग
दिल्ली से आए राजू ने 786 नंबर वाले नोटों से बनी एक अनूठी पतंग प्रदर्शित की, जिसकी कीमत 14 हजार रुपये बताई गई। इतिहासकार देवेश शर्मा ने प्राचीन पेंटिंग्स और हस्तलिखित दुर्लभ पुस्तकों के माध्यम से इतिहास के अनछुए पहलुओं को उजागर किया। प्रदर्शनी में राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के विभिन्न राज्यों के मनी एक्सचेंजर्स ने भी हिस्सा लिया, जिससे यह आयोजन और भी विविधतापूर्ण बन गया।
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