जिंक और सल्फर की कमी के कारण
- असंतुलित मात्रा में अकार्बनिक खाद का प्रयोग।
- जमीन से लगातार और अधिक उत्पादन लेना।
- कार्बनिक खाद का खेतों में कम प्रयोग।
- फसल कटाई के बाद खेत में अवशेषों को जलाना।
ये होगा शरीर पर असर
- अनाज, दलहन, तिलहन फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी।
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्वों की शरीर में कमी।
- शरीर की वृद्धिदर में गिरावट, औसत शारीरिक कद में लगातार कमी।
देश भर में हो रहा अध्ययन
डॉ. राकेश ने बताया कि फसलों की गुणवत्ता और पोषण को प्रभावित करने वाले छह माइक्रोन्यूट्रिएंट की मिट्टी में उपलब्धता का अध्ययन चल रहा है। इसको लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइल साइंस सभी जगह से मिट्टी के नमूने ले रही है। जहां के नमूने फेल हो रहे हैं, वहां के लोगों को जिंक, सल्फर को लेकर जागरुक किया जा रहा है।
जिंक कई प्रकार के एंजाइम का घटक है। यह फॉस्फोरेस के अवशोषण को भी नियंत्रित करता है। कोशिकाओं में अकार्बनिक फॉस्फोरस की सांध्रता बढ़ने से पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। जिंक मानव शरीर में इम्युनिटी को बढ़ाने में सहायक है। यह शरीर की कोशिकाओं में मौजूद होता है। यह कोशिका विभाजन, उनकी वृद्धि, घाव भरने में और कार्बोहाइड्रेट के उपापचन में सहायक है। जिंक गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए जरूरी है।
-डॉ. आरएसएस सेंगर, बायोटेक विभागाध्यक्ष, कृषि विवि
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