शास्त्रीनगर ड्रग्स स्कैंडल का खुलासा करने वाली बिटिया पुलिस के रुख से व्यथित और नाराज है। इसलिए कि पुलिस घिनौने खेल को प्रेम प्रसंग की आड़ लेकर दबाना चाहती है। पूरे मामले में खाकी की भूमिका ऐसी नजर आ रही है, जैसे वह आरोपियों की सरपरस्त हो गई हो।
लेकिन, बिटिया ने ठान ली है कि वह पुलिस के इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने देगी। शनिवार को ‘अमर उजाला’ से अपना दर्द बयां करते हुए बिटिया ने साफ कहा कि उसके साथ घिनौना काम करने वाले आरोपियों को वह किसी सूरत में नहीं छोड़ेगी। उसने जिस हिम्मत के साथ इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है, उससे भी कहीं आगे बढ़कर इंसाफ की लड़ाई लड़ेगी।
बिटिया ने कहा, इंसाफ की लड़ाई में परिजन मेरे साथ हैं। आरोपी अरीब सिद्दीकी, शशांक प्रधान, सिद्धार्थ गुर्जर, शुभम प्रधान और सारिक ने मेरे साथ घिनौनी हरकत की है। मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। ऐसे लोगों को मैं भला कैसे छोड़ दूंगी। इंसाफ के लिए मुझे चाहे लखनऊ या फिर दिल्ली तक क्यों न जाना पड़े। पुलिस के रुख से आहत बेटी ने कहा कि वह अपने परिजनों के साथ आईजी आलोक शर्मा और डीआईजी आशुतोष कुमार से भी गुहार लगाएगी।
साथी छात्रा ने बर्बाद करा दी जिंदगी
बिटिया ने कहा, उसकी एक सहपाठी आरोपी शशांक प्रधान की दोस्त है। उसने ही दोस्ती का वास्ता देकर मुझे इस दलदल में फंसाया था। ड्रग्स स्कैंडल में मेरी वह सहपाठी भी शामिल है। वह लड़कों के साथ मौज-मस्ती करती है और साथी छात्राओं को ड्रग्स गिरोह के सदस्यों से मिलवाती है।
पूल पार्टी में देखा था नंगा नाच
बिटिया ने बताया, ड्रग्स स्कैंडल के आरोपी नाबालिग लड़कियों को पूल पार्टी में लेकर जाते थे। जून माह में अरीब के कहने पर मैं भी पूल पार्टी में गई थी। वहां ड्रग्स स्कैंडल के आरोपियों का नंगा नाच देखकर मैं अपने घर लौट गई थी। गिरोह में करीब दो दर्जन से अधिक लड़के हैं। वे 40 से अधिक नाबालिग छात्राओं को ड्रग्स देकर अपना शिकार बना चुके हैं। पूल पार्टी में कई लड़कियां तो मेरे जान-पहचान की थीं।
मैं नहीं भूल सकती वो मनहूस दिन
बकौल बिटिया, अरीब से मेरी दोस्ती सहपाठी छात्रा ने कराई थी। अरीब ने कई बार मुझ पर गलत काम करने का दबाव बनाया। इनकार करने पर जान से मारने की धमकी तक दी। इसे लेकर अरीब से मेरी दोस्ती टूट गई थी। मैंने उसे फेसबुक से भी अनफ्रैंड कर दिया था। लेकिन, उसने फिर से फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी, जिसे मैंने इग्नोर कर दिया था। इसके बाद सहपाठी छात्रा का फोन आया और उसने बहला-फुसलाकर दोबारा दोस्ती करा दी।
वो दिन मेरी जिंदगी का मनहूस दिन साबित हुआ। तभी से मैं उसके जाल में फंसती चली गई। क्लास बंक मारकर पीवीएस भी गई। 27 जुलाई को अरीब मुझे बहला-फुसलाकर गंगानगर ले गया। वहां शशांक प्रधान, सिद्धार्थ गुर्जर, शुभम प्रधान, साकिब पहले से मौजूद थे। अरीब ने अपने जान-पहचान की दुकान से पेस्ट्री लाकर मुझे खिला दी। इससे मैं बेहोश हो गई। उसके बाद आरोपी मुझे एक गेस्ट हाउस में ले गए। वहां मेरे साथ घिनौना काम किया। होश में आने पर मैं स्कूल के टाइम में ही घर लौट गई। उसी मनहूस दिन मेरी जिंदगी बर्बाद हुई। लेकिन, अब मैं उन आरोपियों को छोड़ूंगी नहीं।