अब कार्रवाई की तलवार उन लोगों पर भी लटक गई है। इन लोगों ने जीवन भर की कमाई लगाकर प्लॉट, मकान या दुकान खरीदी है। कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर मकान बनाए हैं। कुछ ने दुकान खरीदकर कारोबार शुरू करने की तैयारी की थी।
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण और प्लॉटिंग अवैध थी, तो इसे शुरुआत में ही क्यों नहीं रोका गया। कार्रवाई होने की स्थिति में उनकी जमा पूंजी और सिर छिपाने की जगह दोनों खतरे में पड़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ने के संकेत हैं। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता उनके भविष्य को लेकर है।
मेडा पहले गंभीर होता तो नहीं बसतीं कॉलोनियां: स्थानीय लोग
एक साल पहले दुकान खरीदी थी, वेल्डिंग का काम करते हुए लोन भी लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कारोबार को लेकर चिंतित हैं। -राहुल
दो साल पहले प्लॉट खरीदकर लोन लेकर मकान बनाया था। अब कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई का खतरा है। हमारा परिवार परेशान है। -अशोक
पति मोबाइल का काम करते हैं और पूरी जमा पूंजी मकान में लगाई है। कार्रवाई हुई तो हमारा परिवार सड़क पर आ जाएगा। -पूनम रानी, गृहिणी
किराये से निकलकर मुश्किल से लोन लेकर अपना मकान बनाया था, अब घर बचाने की चिंता है। -गजराज सिंह
मेडा पर मिलीभगत के आरोप
बिल्डरों ने लोगों को पूरे सब्जबाग दिखाकर कॉलोनियां शुरू कीं। एमडीए की टीम समय-समय पर आती रही, लेकिन सेटिंग कर कॉलोनियां कटवाती रही। कुछ बिल्डरों ने सेटिंग से तो कुछ ने राजनीतिक रसूख का लाभ उठाया। लावड़-सोफीपुर मार्ग पर दोनों ओर कॉलोनियां काटकर नया मोदीपुरम बसा दिया गया। अब उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने पूरी कमाई लगाकर या कर्ज लेकर यहां मकान, दुकान या प्लॉट लिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि एमडीए पहले ही गंभीर होता तो यह कॉलोनियां नहीं बसतीं।