दिखता है असर
जिस साल अलनीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण पश्चिम मानसून पर उसका निश्चित असर पड़ता है। इससे पृथ्वी के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है, तो कुछ हिस्से अकाल की मार सहते हैं। भारत में यह मानसून सीजन में ही अपना असर दिखाता है।
प्रशांत, हिन्द महासागर में असर
प्रशांत महासागर से लेकर हिन्द महासागर के भारतीय ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र के वायुदाब में होने वाला परिवर्तन ही अक्सर दक्षिणी कम्पन को जन्म देता है। जब प्रशांत महासागर में उच्च दाब की स्थिति होती है, तब अफ्रीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक हिन्द महासागर के दक्षिणी हिस्से में निम्न दाब की स्थिति पाई जाती है।
इस बार अलनीनो की स्थिति कमजोर है। इसकी वजह से ठंड कम रहने के आसार दिख रहे हैं। हालांकि आने वाले समय में मौसम में कुछ बदलाव दिखाई दे सकता है। नॉर्थ रीजन में इसका असर ज्यादा रहेगा।
-डॉ. यूपी शाही, मौसम विशेषज्ञ, कृषि विवि
अलनीनो का असर जिस वर्ष रहता है, उस साल सर्दी का असर ज्यादा नहीं दिखता है। ठंड सामान्य रहती है। अभी सामान्य स्थिति चल रही है। आने वाले समय में इसका असर बढ़ने और मौसम बदलने के आसार हैं।
-डॉ. एन सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर
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