खराब मौसम के बावजूद दूर-दराज से पहुंचे छात्र, कैंपस में गोपनीय विभाग के सामने घंटों खड़े रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
छात्र नेता अंकित अधाना ने बताया कि विवि ने अब सीधे समाधान की जगह प्रक्रिया को कॉलेजों के हवाले कर दिया है। सबसे ज्यादा समस्या बीएड छात्रों को आ रही है, जिनकी मार्कशीट मांगी जा रही है, लेकिन विवि के रिकॉर्ड में 25 हजार से ज्यादा छात्र डिटेड श्रेणी में हैं।
छात्रों का आरोप है कि अधिकांश कॉलेज इस मौके का फायदा उठाकर तीन से पांच हजार रुपये लेकर मार्कशीट अपडेट कराने की बात कह रहे हैं। कई छात्र ऐसे भी हैं जो कैंपस में आठ महीने से लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी मार्कशीट अब तक नहीं भेजी गई।