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सेंट्रल मार्केट: कमाई बंद, घर भी छिनने का डर, व्यापारियों की दो टूक-फ्री दुकानें दो या हर माह 50 हजार रुपये

Sat, 25 Jul 2026 10:58 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने दुकानें बंद होने से रोजी-रोटी का संकट बताते हुए निशुल्क दुकानें देने या नई दुकानें मिलने तक हर माह ₹50,000 भरण-पोषण राशि देने की मांग की है। परिषद जल्द ध्वस्तीकरण नोटिस जारी कर सकती है।
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सेंट्रल मार्केट मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारी और महिलाओं की शुक्रवार को आवास एवं विकास परिषद में अधिकारियों के साथ बैठक हुई। महिलाओं ने कहा कि घरों में बनी दुकानें बंद होने से रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। अब घर भी छिनेगा तो कहां जाएंगे। सभी ने एकमत होकर कहा कि जब तक दुकानें बनाकर उन्हें नहीं दी जातीं, तब तक हर व्यापारी को भरण पोषण के लिए प्रति माह 50-50 हजार रुपये दिए जाएं। अपनी बात रखने को लेकर इस दौरान व्यापारियों में आपस में नोकझोंक भी हो गई।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के लिए 17 जुलाई को मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने प्रभावित लोगों व दुकानदारों से वार्ता की थी। इस दौरान प्रभावितों को जागृति विहार विस्तार योजना में रियायती दरों पर फ्लैट देने, बिल्डर द्वारा उनके मकानों के स्थान पर पुनर्निर्माण करने, पल्लवपुरम व गंगानगर में वेंडिंग जोन में दुकानें देने पर चर्चा हुई थी। शास्त्रीनगर में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 368 तथा एलआइजी श्रेणी के 138 मकान हैं। 

आवास विकास परिषद ने सेक्टर सात में रंगोली मंडप के पास पुराने सामुदायिक भवन के स्थान पर 116 दुकानों का कॉम्प्लेक्स तथा हापुड़ रोड पर रायल प्लाजा के पास 80 दुकानों का कॉम्प्लेक्स निर्माण कराने की योजना तैयार की है। इसके लिए बृहस्पतिवार को टेंडर जारी कर कंपनियों से बोली मांगी गईं। टेंडर खुलने के बाद जल्द ही इन दोनों स्थानों पर निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
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शुक्रवार को परिषद के कार्यालय में ईडब्ल्यूएस, एलआइजी आवंटी व व्यापारियों की बैठक में व्यापारी नेता अर्पित मोघा का कहना था कि सभी व्यापारी इतने सक्षम नहीं हैं कि दुकानें खरीद सकें। ऐसे में उन्हें निशुल्क दुकानें दी जाएं। बिल्डर द्वारा मकानों के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव को सभी ने खारिज कर दिया। इस दौरान जतिन जुनेजा, नीरज त्यागी, आलोक सोम, शीतल पुजानी, राधा गुप्ता, शालिनी शर्मा, प्रीति आदि मौजूद रहे। 

अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम भी नई सड़क पर अपने नए कार्यालय परिसर में 48 दुकानें बना चुका है, सूरजकुंड पर 40 दुकानें तथा महापौर कैंप कार्यालय परिसर में 180 दुकानों का कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी की जा रही है। इन दुकानों को भी आवंटित करने में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि प्रभावित लोगों की ओर से दिए गए प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। एडीएम सिटी बृजेश सिंह, अधीक्षण अभियंता राहुल यादव आदि मौजूद रहे।

11 सदस्यीय कमेटी का किया गया गठन
तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज गर्ग के मुताबिक परिषद एवं अधिकारियों से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इसमें मनोज गर्ग, आलोक सोम, शुभम दुबलिश और हरि पुजानी तथा पूर्व पार्षद संजीव पुंडीर के अलावा प्रीति कपूर, राधा गुप्ता समेत छह महिलाओं को रखा गया है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों ने बैठक में कहा कि वर्तमान दुकानों को ध्यान में रखते हुए ग्राउंड फ्लोर पर निशुल्क दुकान दी जाएं। दुकानदारों को कम कीमत पर दुकान देने और बिल्डर द्वारा पुनर्निर्माण के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।

ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस की तैयारी कर रही परिषद
आवास एवं विकास परिषद की ओर से अब दुकानदारों को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करने की तैयारी है। शुक्रवार को अधिकांश दुकानदारों ने मिलकियत को लेकर दस्तावेज परिषद कार्यालय में जमा करा दिए। हालांकि अभी भी कुछ दुकानदारों की ओर से ब्योरा नहीं दिया गया है। वहीं परिषद इस मामले में विधिक राय ले रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सोमवार से इन सभी 44 दुकानदारों को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस में 15 दिन का समय देते हुए अनधिकृत निर्माण खुद तोड़ने को कहा जाएगा। 
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इस अवधि में अनधिकृत निर्माण न हटाने पर परिषद हर्जाना वसूलकर इसे ध्वस्त करेगा।अब मामले में 27 जुलाई को मुख्यमंत्री के सलाहकार मेरठ आकर समीक्षा करेंगे। उनके समक्ष सभी बिंदु रखे जाएंगे। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई को अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त निर्देश दिए थे। परिषद की ओर से आवासीय भवन में पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियां होने पर 44 संपत्तियों को 8 अप्रैल को सील किया गया था। 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला व न्यायाधीश केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने इन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। इन संपत्तियों में कई में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बने हैं। इसके अलावा स्कूल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, बैंक्वेट हॉल, मिष्ठान भंडार, जिम, शोरूम आदि का संचालन हो रहा था। 

परिषद ने सील खोलकर संपत्तियों में किए गए अनधिकृत निर्माण, स्वीकृत निर्माण व मालिकों की जानकारी जुटाते हुए सर्वे किया गया और बाद में फिर से इन्हें सील कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हुई। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि एक ही संपत्ति में कई दुकानें, प्रतिष्ठान हैं, जिनके कई स्वामी हैं। 

ध्वस्तीकरण के बाद मिलकियत संबंधी किसी तरह का विवाद न हो इसके लिए सभी दुकानदारों से दस्तावेज मांगे गए हैं। मामले में विधिक राय लेकर परिषद नोटिस जारी करेगा। नोटिस मिलने के बाद सील खोली जाएगी, जिसके बाद संपत्ति स्वामी को 15 दिन में ध्वस्तीकरण कर मूल स्वरूप में लाना होगा। इसमें स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण स्वीकार्य होगा।
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