14 जुलाई को 44 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश
बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को 44 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। परिषद की ओर से आठ अप्रैल को इन 44 भवनों को सील किया गया था। ये मूल रूप से आवासीय संपत्तियां हैं, जिनमें स्कूल, नर्सिंग होम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मिठाई की दुकान समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परिषद ने इन संपत्तियों का सर्वे कर सील खोल दी थी। इसके बाद से कई आवंटी खुद ही अपनी संपत्तियों में किए गए अवैध निर्माण को हटाने में जुटे हैं।
मूल स्वरूप में लौटाने के लिए हो रहा सर्वे
परिषद की ओर से विभिन्न योजनाओं में सर्वे भी कराया जा रहा है। सर्वे के जरिए यह देखा जा रहा है कि संबंधित संपत्तियों के मूल स्वरूप में किस तरह के बदलाव किए गए हैं और कहां अवैध निर्माण किया गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अनुसार, व्यापारी नेता संजीव मित्तल की ओर से दाखिल याचिका में सेंट्रल मार्केट, मेरठ या सेटबैक को लेकर कोई उल्लेख नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कॉलोनी के मामले में सरकार को पॉलिसी बनाने के निर्देश दिए हैं।
21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
प्रकरण में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होनी है। सेंट्रल मार्केट के व्यापारी नेता अर्पित मोघा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के फैसले से व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली है। उनके मुताबिक आदेश में कहीं भी सेंट्रल मार्केट का उल्लेख नहीं है और अवैध निर्माण को मूल स्वरूप में लाने के आदेश पहले से लागू हैं।