फाइनल तक 60 फीसदी छात्र-छात्राएं होते हैं बाहर
डिग्री कॉलेजों में भारी भरकम बजट के बाद भी 60 फीसदी छात्र-छात्राएं फाइनल ईयर तक पहुंचते-पहुंचते बाहर हो जाते हैं। इसकी तस्वीर हर साल प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों की संख्या से साफ देखी जा सकती है। 2019 में बीए प्रथम वर्ष में जहां 48635 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए, वहीं द्वितीय वर्ष में इनकी संख्या 32576 रह गई। तृतीय वर्ष में सिर्फ 26153 संख्या रह गई। बीएससी में प्रथम वर्ष में 18974 छात्र-छात्राएं थे। तृतीय वर्ष में इनकी संख्या 7683 रह गई। बीकॉम में 17563 छात्र-छात्राएं थे, तृतीय वर्ष में 12821 रह गए। वर्तमान की बात करें तो इस समय सीसीएसयू के कॉलेजों में बीए प्रथम वर्ष में 100150 छात्र-छात्राएं परीक्षाएं दे रहे हैं। द्वितीय वर्ष में इनकी संख्या 59457 है और तृतीय वर्ष में 56713 है। बीकॉम में प्रथम वर्ष में 22560 छात्र-छात्राएं हैं, द्वितीय वर्ष में 17130 हैं और तृतीय वर्ष में 18079 हैं। बीएससी की बात करें तो प्रथम वर्ष में 15821 छात्र-छात्राएं हैं, द्वितीय वर्ष में 11046 और तृतीय वर्ष में घटकर इनकी संख्या 7576 रह गई है।
ये फॉर्मूला इसलिए जरूरी
कोरोना महामारी के सामने छात्रों के स्वास्थ्य को दांव पर नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन उच्च शिक्षा में आंख मूंदकर भी सबको पास नहीं किया जा सकता है। पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो साल 2019 में बीए-बीएससी प्रथम वर्ष में 66 फीसदी छात्र-छात्राएं फेल हुए। बीकॉम में 53.27 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए। बीए प्रथम वर्ष में 48635 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इनमें से सिर्फ 17598 छात्र-छात्राएं पास हुए, यानी 31037 छात्र-छात्राएं फेल हो गए। बीएससी प्रथम वर्ष में 18974 छात्र-छात्राओं में से सिर्फ 6573 ही पास हो पाए। 66 फीसदी फेल हो गए। बीकॉम में 17563 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 9355 पास हुए। 57 फीसदी फेल हो गए। सिर्फ प्रथम वर्ष ही नहीं द्वितीय वर्ष का रिजल्ट भी ठीक नहीं रहा। ये रिजल्ट यह बताने के लिए काफी है कि हर साल सिर्फ 35 फीसदी छात्र पास हो रहे थे, अब प्रोन्नति में सौ फीसदी हो जाएंगे।
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