वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी, अदालत ने पूछा- कुछ कहना है?
सजा पर फैसला सुनाए जाने से पहले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला जज के सामने अलग-अलग पेश किया गया। अदालत ने दोनों से उनकी बात रखने का अवसर दिया। दोनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है।
सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, अदालत ने दोनों से विभिन्न मुद्दों पर सवाल किए। इनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े पहलू भी शामिल थे। उन्होंने सवालों का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया, लेकिन बताया कि दोनों ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
जेल अधीक्षक के अनुसार, फैसले से पहले दोनों बेचैन नजर आ रहे थे। उन्होंने रात और सुबह के भोजन में भी कम खाना खाया था और ठीक से सो नहीं पा रहे थे। हालांकि, यह जानकारी जेल प्रशासन के हवाले से है।
मुस्कान ने बेटी से मिलने की गुजारिश की है
सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मुस्कान पिछले तीन-चार दिनों से अपनी बड़ी बेटी से मिलने की गुजारिश कर रही थी। बच्ची की उम्र करीब सात साल बताई गई है। हालांकि, जेल अधीक्षक के अनुसार, बच्ची को उससे मिलवाने के लिए जेल नहीं लाया गया था।
सजा पर सुनवाई के दौरान भी मुस्कान की दोनों बेटियों का मुद्दा उठा। बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने बच्चियों के भविष्य और पालन-पोषण का हवाला देते हुए अदालत से कम सजा देने की अपील की। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाकर कड़ी सजा की मांग की।
अभियोजन ने क्यों की थी कड़ी सजा की मांग?
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पैरवी की थी। अभियोजन की दलील थी कि मुस्कान ने अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में साहिल शुक्ला के साथ मिलकर भूमिका निभाई। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उसे नीले ड्रम में छिपाने के लिए सीमेंट का इस्तेमाल किया गया।
अभियोजन पक्ष ने वारदात की प्रकृति, शव को छिपाने के तरीके और अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए मृत्युदंड की मांग की। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने पारिवारिक परिस्थितियों और मुस्कान की बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखने की अपील की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुनाया।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन
24 फरवरी 2025: सौरभ राजपूत लंदन से नौकरी छोड़कर मेरठ स्थित अपने घर लौटा।
3 मार्च 2025: पुलिस जांच के अनुसार, इसी अवधि में सौरभ की हत्या की गई।
4 मार्च 2025: शव को नीले ड्रम में छिपाने और सीमेंट से ढकने से संबंधित घटनाक्रम सामने आया।
18 मार्च 2025: सौरभ के भाई बबलू की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
19 मार्च 2025: घर से नीला ड्रम काटकर शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। दोनों आरोपियों को जेल भेजा गया।
12 मई 2025: पुलिस ने अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।
30 सितंबर 2026: जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया।
14 अक्टूबर 2026: अदालत ने दोनों दोषियों की सजा पर फैसला सुनाते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
देशभर में चर्चा में रहा नीला ड्रम केस
सौरभ राजपूत हत्याकांड शव को छिपाने के तरीके और पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के कारण देशभर में चर्चा में रहा। पुलिस ने गवाहों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी की। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत में पैरवी की।
सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और परवरिश का मुद्दा उठाया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
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