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Meerut: खूनी खेल... वर्चस्व के लिए पार्षद आरिफ और माफिया शारिक में शुरू हुई थी गैंगवार, हो चुकी कई हत्याएं

Tue, 20 Aug 2024 11:44 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

जरायम की दुनिया में वर्चस्व की जंग को लेकर पार्षद आरिफ और माफिया शारिक के बीच गैंगवार शुरू हुई थी। इस गैंगवार में कई हत्याएं हो चुकी हैं। 
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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दोहरे हत्याकांड में सजा का मामला, हथियारों की सप्लाई और सट्टे की वसूली को लेकर आए थे आमने-सामने
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जरायम की दुनिया में वर्चस्व की जंग को लेकर पार्षद आरिफ और माफिया शारिक के बीच गैंगवार शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों ओर से कई लोगों की हत्याएं हुईं। इसी गैंगवार में पार्षद आरिफ और उसके दोस्त शादाब उर्फ भूरा की हत्या कर दी गई। आरिफ के बाद उसके भतीजे सलमान ने इस गैंगवार को जारी रखा। इनका आतंक बढ़ता देख पुलिस ने दोनों के गैंग पंजीकृत करा दिए। इसके बाद भी दोनों जेल में रहकर गिरोह चलाते रहे। शारिक अभी जेल में है, जबकि सलमान फिलहाल जमानत पर बाहर है। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली में बैठकर अपने गिरोह से वारदात करा रहा है।
 

गाजी बिरादरी के पार्षद आरिफ और माफिया शारिक के गिरोह में करीब 10 वर्ष पहले रंजिश शुरू हुई थी। हथियारों की सप्लाई और सट्टे की वसूली करने को लेकर दोनों पक्षों के लोगों की हत्याएं की जाने लगीं। 26 दिसंबर 2016 को बिलाल हत्याकांड में जेल में बंद आरिफ के भतीजे सलमान से मिलाई करके लौट रहे किन्नर शमशाद की साकेत क्षेत्र में हत्या कर दी गई थी। इसमें शारिक और फाइक को नामजद किया गया था। इसके बाद 16 मई 2017 को शारिक और फाइक के करीबी माने जाने वाले किन्नर पूर्व पार्षद फाको की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप आरिफ के भतीजे सलमान पर आया था। हत्या में पांच लाख की सुपारी दी गई थी।

इसके बाद शमशाद की हत्या के मामले में गवाह पार्षद आरिफ और उसका दोस्त शादाब उर्फ भूरा की नौ जुलाई 2017 को हत्या कर दी गई। अभी भी दोनों गिरोह में गैंगवार जारी है। पार्षद आरिफ और शादाब हत्याकांड में डी-103 गिरोह के सरगना शारिक और उसके तीन भाई व पुत्र समेत सात को उम्रकैद की सजा हो गई। वहीं, सलमान का गैंग डी-170 के नाम से पंजीकृत है।
 

सैलून गए थे आरिफ और शादाब
जेल में बंद रहते हुए शारिक अपने गिरोह से पार्षद आरिफ पर हमला करा चुका था। इसके बाद आरिफ ने घर से निकलना कम कर दिया था। नौ जुलाई की शाम वह शादाब उर्फ भूरा के साथ घर से निकला था। वह कोतवाली थाने से महज 100 मीटर दूर सैलून में शेविंग कराने पहुंचा। शादाब सैलून के बाहर खड़ा था। तभी तीन बाइकों पर हमलावर आए। उन्होंने पहले शादाब को गोली मारी। इसके बाद सैलून में घुसकर आरिफ पर फायरिंग कर दी। ताबड़तोड़ फायरिंग से बाजार में भगदड़ मच गई थी। आरिफ की मौके पर ही मौत हो गई थी। शादाब को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
 
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जेल में रची गई आरिफ की हत्या की साजिश
आरिफ की हत्या की साजिश शारिक ने जेल में ही रची थी। इसके लिए उसने पहले से जेल में बंद शाहीन से हाथ मिला लिया था। हत्या की सुपारी कोतवाली क्षेत्र के ही सुपारी किलर को दी गई थी। वह उस समय दिल्ली के सीलमपुर में रह रहा था। पुलिस इस सुपारी किलर के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं जुटा पाई थी।
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