हकीकत में ये कूड़ा नहीं उठा रही हैं। यानी इन गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल, रखरखाव, ड्राइवर और कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों का वेतन लिया जा रहा होगा। हालांकि यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि इन गाड़ियों के लिए कितना पैसा लिया जा रहा है। इस भ्रष्टाचार में निगम और बीवीजी कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारी की भूमिका होने का अंदेशा है। इससे निगम और कंपनी के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। कूड़ा निस्तारण को लेकर एनजीटी में शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि नगर निगम ने शहर से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की लिस्ट एनजीटी में प्रस्तुत की है, जिनमें से 43 गाड़ियां निजी लोगों की मिलीं।
स्वच्छता सर्वे में कैसे पास होगा निगम
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा प्लांट और गाड़ियों में भ्रष्टाचार नगर निगम ही करेगा तो स्वच्छता सर्वे में कैसे पास होगा। अशोका लीलैंड की जगह महिंद्रा कंपनी का हाईवा ट्रक का मामला अभी ठंडा हुआ नहीं था कि अब कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में भ्रष्टाचार सामने आ गया। एक के बाद एक भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्या कहते हैं अधिकारीयह गंभीर मामला है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की लिस्ट देखी गई, जिसमें कई गाड़ियों के नंबर मिले हैं, जोकि नगर निगम में नहीं हैं। इसकी जांच शुरु करा दी है। इन गाड़ियों के पेट्रोल-डीजल, रखरखाव और ड्राइवर का भुगतान हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। - डॉ. हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
नगर निगम की 188 गाड़ियां हमारे पास हैं, जिनसे शहर का कूड़ा उठाया जाता है, जो 43 गाड़ियां लिस्ट में हैं, वह कहां हैं। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। सब गाड़ियों की अलग-अलग लिस्ट निगम के अधिकारियों को भेज दी है। -सलील, प्रोजेक्ट मैनेजर बीवीजी कंपनी