हापुड़ के पास गुलावठी में करीब 60 बीघा भूमि पर इकाई स्थापित है। यहां दो कारखाने, कार्यालय भवन और अतिथि गृह तैयार किए गए हैं। कारखाना पूरी क्षमता से शुरू होने के बाद मेरठ और आसपास के क्षेत्र के 700 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। करीब एक वर्ष पहले पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के साथ बैठक हुई थी।
इसमें सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल समेत विभिन्न सुरक्षा बलों के अधिकारी शामिल हुए थे। इसके बाद ब्यूरो के उपमहानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों ने फैक्टरी का निरीक्षण किया। इसके अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक हुई।
अफसरों के मुताबिक कौशल विकास मंत्रालय, सेना, नौसेना, वायुसेना और आईआईटी रोहतक के अधिकारियों के साथ पांच से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। योजना दिसंबर 2025 तक तैयार कर ली गई थी। आईआईटी रोहतक और कौशल विकास मंत्रालय की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट भी दे चुकी हैं। 15 सितंबर को हुई बैठक में सेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मंत्रालय, भूमि विकास मंत्रालय सहित अन्य के प्रतिनिधि रहे।
1997 से 2013 तक विदेशी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम
नादिर अली एंड कंपनी का इंग्लैंड की बूसी एंड हॉक्स कंपनी के साथ 1997 से 2013 तक संयुक्त उपक्रम रहा। इस दौरान विदेशों में भी मेरठ में बने बैंड वाद्य यंत्रों की आपूर्ति हुई। फैज आफताब ने बताया कि इस दौरान अमेरिकी नौसैनिक दल, अमेरिकी राष्ट्रपति के निजी बैंड, बकिंघम पैलेस, अरब देशों और जॉर्डन के राजा के लिए भी मेरठ में बने बैंड वाद्य यंत्रों की आपूर्ति की गई।
जीआई टैग से मिली नई पहचान
मेरठ के बैंड बाजा उद्योग को करीब डेढ़ वर्ष पहले जीआई टैग मिला। इससे स्थानीय निर्माताओं को अपने उत्पादों की पहचान और बाजार विस्तार में मदद मिली है। अब मेरठ के बिगुल, पाइप बैंड, ट्रंपेट, कॉर्नेट, यूफोनियम और सुजाफोन समेत सशस्त्र सेनाओं में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न वाद्य यंत्रों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।