पुलिस ने पूछताछ की तो दोनों ने मोबाइल टावरों से आरएचएस प्लेट चोरी करने की बात कबूल की। इनमें सोनू उर्फ इमरान कबाड़ी भी है, जिसकी मुरादनगर में कबाड़ी की दुकान है।
आरोपियों ने बताया कि गैंग में बुलंदशहर, नोएडा और हापुड़ के पांच युवक भी शामिल हैं। वह एक साल से परतापुर, जानी, हापुड़, गाजियाबाद और नोएडा से मोबाइल टावरों से प्लेट और वायर चोरी कर चुके हैं। मुरादनगर में कबाड़ में इन प्लेटों को रखते थे। जहां से गुरुग्राम में यह प्लेट जाती थी।
इंस्पेक्टर परतापुर ने बताया कि एक प्लेट की कीमत 1.10 लाख रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की है। आरोपी सोनू कबाड़ी है जो इन प्लेट को 18 से 20 हजार रुपये में खरीदकर उन्हें गुरुग्राम में दूसरे कबाड़ियों को बेच देता था। अभी तक इनसे 14 टॉवरों से चोरी हुई 18 प्लेटों और कॉपर वायर को बरामद किया गया है।
इसलिए हो जाते थे सिग्नल वीक
इंस्पेक्टर परतापुर के अनुसार मोबाइल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि एक मोबाइल टावर में दो प्लेट लगी होती हैं। यदि टावर से एक प्लेट हटा दी जाए तो सिग्नल कम हो जाते हैं। दोनों प्लेट चोरी होने पर टावर काम करना बंद कर देता है।
पुलिस का कहना है कि अलग-अलग कंपनियों से सुशील कुमार, विनोद कुमार, देवेंद्र सोलंकी, अरुण कुमार व बंटू यादव ने भी इस गिरोह को पकड़ने में पुलिस की मदद की। मोबाइल कंपनी के मैनेजर ने बताया कि एक साल में चोरों ने टावरों से लगभग एक करोड़ का सामान चोरी किया है। आरोपियों पर चोरी के सात मुकदमे दर्ज हैं।